पीएम मोदी के व्यक्तिगत हस्तक्षेप के बाद बांग्लादेश ने उल्फा नेता अनूप चेतिया को भारत को सौंपा

उल्फा के शीर्ष नेता अनूप चेतिया को आज बांग्लादेश ने भारत को सौंप दिया। वह पिछले दो दशक से भी अधिक समय से फरार था। अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन को इंडोनेशिया से स्वदेश लाए जाने के ठीक बाद यह अहम घटनाक्रम हुआ है। चेतिया (48) प्रतिबंधित यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) का संस्थापक महासचिव है। वह हत्या, अपहरण, बैंक डकैती और फिरौती के मामलों में वांछित था।

पीएम मोदी के व्यक्तिगत हस्तक्षेप के बाद बांग्लादेश ने उल्फा नेता अनूप चेतिया को भारत को सौंपा

नयी दिल्ली : उल्फा के शीर्ष नेता अनूप चेतिया को आज बांग्लादेश ने भारत को सौंप दिया। वह पिछले दो दशक से भी अधिक समय से फरार था। अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन को इंडोनेशिया से स्वदेश लाए जाने के ठीक बाद यह अहम घटनाक्रम हुआ है। चेतिया (48) प्रतिबंधित यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) का संस्थापक महासचिव है। वह हत्या, अपहरण, बैंक डकैती और फिरौती के मामलों में वांछित था।

उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तिगत हस्तक्षेप पर इस उग्रवादी नेता को बांग्लादेश ने आज सुबह भारतीय अधिकारियों को सौंपा। इस कार्य में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल की सक्रिय भागीदारी रही है। चेतिया का मूल नाम गोलप बरूआ है।

भारत दो दशक से अधिक समय से चेतिया को सौंपे जाने की मांग कर रहा था लेकिन बांग्लादेश की सरकारें किसी प्रत्यर्पण संधि के न होने का हवाला देते हुए सहयोग करने से इनकार करती आई थीं। सूत्रों ने कहा, शेख हसीना सरकार ने बांग्लादेशी सरजमीं से भारत विरोधी ताकतों को संचालित होने की इजाजत नहीं देने की अपनी नीति का अनुसरण करते हुए व्यक्तिगत तौर पर यह फैसला लिया। 27 साल से फरार अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन को कुछ दिन पहले भारत लाए जाने के बाद यह अहम घटनाक्रम हुआ है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 1990 के दशक के शुरू में भारत से फरार होने के बाद से चेतिया बांग्लादेश में था। हालांकि, उसे मार्च 1991 में गिरफ्तार किया गया था लेकिन असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया ने उसे जेल से रिहा कर दिया जिसके बाद वह भारत से भाग गया था।

प्रधानमंत्री के रूप में हसीना के प्रथम कार्यकाल के दौरान बांग्लादेश पुलिस ने उसे 21 दिसंबर 1997 को गिरफ्तार किया था। ढाका पुलिस ने उसे विदेशी अधिनियम एवं पासपोर्ट अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था तथा उस पर बांग्लादेश में अवैध रूप से घुसने के अलावा अवैध विदेशी मुद्रा, हथियार एवं सेटेलाइट फोन रखने का आरोप लगाया था। उसे सात साल कैद की सजा सुनाई गई। हालांकि, कैद की अवधि पूरी होने के बाद उसने रिहा नहीं होने को प्राथमिकता दी और राजनीतिक शरण मांगी। वह हाईकोर्ट के 2003 के निर्देश के तहत जेल में ही रहा। अदालत ने बांग्लादेशी अधिकारियों को उसे सुरक्षित रूप से हिरासत में तब तक रखने का निर्देश दिया था जब तक कि उसकी शरण याचिका पर फैसला नहीं हो जाता।

सूत्रों ने बताया कि उसकी यह याचिका खारिज हो गई पर बाद की बांग्लादेशी सरकारें उसे भारत को सौंपने को इच्छुक नहीं थीं जबकि सारी कानूनी अड़चनें दूर हो गई थीं। जेल में रहते हुए भी वह अपनी रानी अख्तर उर्फ मोनिका के जरिए उल्फा प्रमुख परेश बरूआ और अन्य नेताओं से नियमित रूप से संपर्क में था ।

मोनिका अपने 22 साल के बेटे बुमोनी उर्फ जुमन और बेटी बुलबुली उर्फ बानया अख्तर के साथ अपनी मर्जी से पिछले साल असम लौट आई । ये लोग बांग्लादेश में चेतिया के साथ थे। चेतिया ने तीन बार- 2005, 2008 और 2011 में बांग्लादेश में राजनीतिक शरण मांगी थी। उसने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भी अनुरोध किया था कि उसे विदेश में शरण दी जाए। उसने दावा किया था कि यदि उसे भारत वापस भेजा गया तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। साल 2008 में उसने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से भी अपील कर शरणार्थी का दर्जा और बांग्लादेश या किसी अन्य सुरक्षित देश में राजनीतिक शरण मांगी थी।