Shahjahan Sheikh West Bengal News: पश्चिम बंगाल में अराजकता अपने चरम पर है. समुदाय विशेष के तुष्टीकरण की वजह से वहां पर आम लोगों का जीना मुहाल हो रहा है. अब विभिन्न आरोपों में जेल में बंद टीएमसी नेता शाहजहां के खिलाफ गवाही देने जा रहे व्यक्ति भोला के बेटे की हत्या करवा दी गई है.
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Attack on witness against Shahjahan Sheikh: आप लोगों ने 80 और 90 के दशकों की सिनेमा में देखा होगा कि विलेन के खिलाफ गवाही देने वालों पर कैसे हमला होता था. अदालत जा रहे गवाहों को अक्सर गुंडे घेरकर मारते थे या फिर ट्रक से कुचल दिया जाता था, ताकि गवाही ना हो और विलेन सजा से बच जाए. पश्चिम बंगाल में वही हो रहा है.
कभी सत्ताधारी पार्टी द्वारा पोषित और करीब 50 मुकदमों के आरोपी संदेशखाली वाले शेख शाहजहां के खिलाफ गवाही देने जा रहे गवाह को ट्रक ने कुचल दिया. गवाही नहीं हुई और सुनवाई टल गई. शेख शाहजहां फिलहाल सुरक्षित हो गया. इसलिए आज हम ममता राज में शेख शाहजहां जैसे अपराधी को सुरक्षा की गारंटी देने वाली व्यवस्था का DNA टेस्ट करेंगे.
शाहजहां ने भोला के बेटे को मरवा दिया?
संदेशखाली का शेख शाहजहां आपको जरूर याद होगा. जो तृणमूल कांग्रेस का नेता था. 2024 में ये तब चर्चा में आया था, जब इसके समर्थकों ने प्रवर्तन निदेशालय की टीम पर हमला कर दिया था. जिसपर हत्या, रेप, जमीन कब्जा, हमला और साजिश जैसे करीब 50 केस दर्ज हैं. जो इस समय बशीरहाट जेल में बंद है. उस पर 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी का भी एक केस है.
भोला घोष नाम के एक व्यक्ति ने केस दर्ज करवाया था. उसी केस में आज सुनवाई थी. भोला घोष अपने बेटे और ड्राइवर के साथ बशीरहाट कोर्ट जा रहे थे. तभी रास्ते में उल्टी दिशा से एक ट्रक आया और उस कार में जोरदार टक्कर मारी, जिसमें भोला घोष बैठे हुए थे. कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. ड्राइवर और भोला घोष के बेटे की वहीं मौत हो गई. जबकि भोला की हालत नाजुक है. उनके परिवार का आरोप है कि जेल में बैठे शेख शाहजहां ने ही इस एक्सीडेंट की साजिश रची थी. हम आपको सुनाते हैं कि परिवाले क्या-क्या आरोप लगा रहे हैं.
जेल में बैठे-बैठे करवा दिया हमला
अगर ये आरोप सही है तो सोचिए ये कितनी बड़ी साजिश है? और जेल में बैठा एक अपराधी ऐसा करने में सफल हो जाता है तो ये सरकार के ऊपर कितना बड़ा सवाल है? आपको याद दिलाना चाहूंगा कि 2024 में 5 जनवरी को ED की टीम पर शेख शाहजहां ने हमला करवाया था. लेकिन गिरफ्तारी हुई थी ठीक 55 दिन बाद. 29 फरवरी को उसे गिरफ्तार किया गया. उसी दिन ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी से उसको निकाला. इन 55 दिनों के दौरान उसपर महिलाओं ने सामूहिक रूप से यौन उत्पीड़न और बलात्कार के केस दर्ज करवाए.
शेख शाहजहां की गुनाहों से भरी कुंडली खुली. सियासी आरोप लगे. तब भी करीब 2 महीने लग गए थे पुलिस को उसे पकड़ने में. आज जब वो जेल में बंद है. पूरी तरह सुरक्षित है. लेकिन जब वो जेल से बाहर था, तब भी उससे आम लोगों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं थी. और आज जब वो जेल में बंद है, तब भी उसके खिलाफ बोलने वालों की जिंदगी की कोई गारंटी नहीं है. गवाह को बीच सड़क पर ट्रक से टक्कर मार दी जाती है, तो कैसे सरकार और सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं, वो सुनिए जरा.
#DNAमित्रों : शाहजहां के खिलाफ जो बोलेगा, ट्रक से कुचला जाएगा!
ममता राज में चश्मदीदों को मारो.. शाहजहां को बचाओ ? #DNAWithRahulSinha #DNA #SandeshkhaliCase #RoadAccident #SandeshkhaliRow | @RahulSinhaTV pic.twitter.com/JJGKSbtV4I— Zee News (@ZeeNews) December 10, 2025
सच बोलने का भुगता खामियाजा
कहा जाता है कि कानून की असली ताकत हथकड़ी में नहीं, बल्कि उस चश्मदीद में होती है जो सच बोलने का साहस रखता है. लेकिन जब समाज में शेख शाहजहां जैसा कोई अपराधी हो. तुष्टिकरण वाली राजनीति हो. सियासी लक्ष्य सिर्फ कुर्सी हो तो सुरक्षा की गारंटी आमलोगों के लिए नहीं होती है बल्कि अपराधी के लिए होती है.