'3 दोस्तों' के हाथ में होगी देश की सुरक्षा की कमान! इनके बीच कॉमन हैं ये बातें...

इन तीनों सेना प्रमुखों के पिताओं ने अलग-अलग पद पर रहकर इंडियन एयरफोर्स में सेवाएं दी हैं...

'3 दोस्तों' के हाथ में होगी देश की सुरक्षा की कमान! इनके बीच कॉमन हैं ये बातें...

नई दिल्ली: लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवाने (General Manoj Mukund Naravane) आज आर्मी चीफ का पद संभालने जा रहे हैं. नरवाने, जनरल बिपिन रावत (General Bipin Rawat) का 3 साल का कार्यकाल आज समाप्‍त हो रहा है. जनरल रावत देश के पहले सीडीएस बनाए हैं. अब थल सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल नरवाने होंगे. वहीं एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया (Air Chief Marshal RKS  Bhadauria) हैं और नौसेना अध्यक्ष करमबीर सिंह (Navy Chief Admiral Karambir Singh) हैं. इन तीनों सेना प्रमुख के बीच दो समानताएं हैं, जो इंटरनेट पर काफी शेयर हो रही हैं. तीनों सेना प्रमुखों के बीच पहली कॉमन कड़ी है उनके पिता और इंडियन एयर फोर्स.

इन तीनों सेना प्रमुखों के पिताओं ने अलग-अलग पद पर रहकर इंडियन एयरफोर्स में सेवाएं दी हैं. नरवाने के पिता और एडमिरल सिंह के पिता तो काफी अच्छे दोस्त भी रहे. वहीं एयर चीफ मार्शल भदौरिया के पिता आईएएफ के एक रिटायर्ट ऑनररी फ्लाइंग ऑफिसर हैं.

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दूसरी दिलचस्प बात ये है कि ये तीनों ही नेशनल डिफेंस अकैडमी (एनडीए) के 1976 बैच के कैडेट हैं. यानी तीनों 56वें एनडीए कोर्स का हिस्सा थे. पुणे स्थित एनडीए में तीन साल इन्होंने एक साथ पसीना बहाया जिसके बाद तीनों अपने-अपने सर्विस अकादमी में चले गए. लेकिन डिफेंस की शुरुआत इन्होंने एक ही साल में एक ही कोर्स जॉइन करने के साथ की. ऐसा कम ही देखा जाता है जब एनडीए के बैचमेट्स ही देश की तीनों सेनाओं के प्रमुख भी बनें.  

बताया जा रहा है कि इससे पहले 1991 में तत्कालीन आर्मी चीफ सुनीत फ्रांसिस रोडरिग्ज, एडमिरल लक्ष्मी नारायण रामदास और एयर चीफ मार्शल निर्मल चंद्र सूरी ने भी एनडीए का कोर्स एक साथ किया था. 

अब उम्मीद की जा रही है कि तीनों प्रमुखों के बीच अच्छी दोस्ती और एक ही बैच के होने की वजह से तीनों सेनाओं के बीच बेहतर सांमजस्य बैठ पाएगा. यह इसलिए भी जरूरी है कि पीएम मोदी ने इस साल स्वंतत्रता दिवस पर घोषणा की थी कि देश को बहुत जल्द पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ मिलेगा जो तीनों सेनाओं का प्रमुख होगा. ऐसे में तीनों सेना प्रमुखों के बीच अगर तालमेल बेहतर होगा तो यह भारतीय सेना के लिए बेहतर होगा.

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