मंदिर-मस्जिद के नाम पर वोट बैंक का खेल कब तक? फ़ैसले के बाद जमीन पर जंग क्यों?

फैसले के बाद से ही विरोध जताने वाले असदुद्दीन ओवैसी ने कल एक पत्रिका को दिये इंटरव्यू में कहा कि मुझे मेरी मस्जिद वापस चाहिए. .

मंदिर-मस्जिद के नाम पर वोट बैंक का खेल कब तक? फ़ैसले के बाद जमीन पर जंग क्यों?
अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आये एक हफ्ता हो गया है और जैसे-जैसे वक्त बीत रहा है इस फ़ैसले पर सियासत तेज़ होती जो रही है

नई दिल्ली: अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आये एक हफ्ता हो गया है और जैसे-जैसे वक्त बीत रहा है इस फ़ैसले पर सियासत तेज़ होती जो रही है. फैसले के बाद से ही विरोध जताने वाले असदुद्दीन ओवैसी ने कल एक पत्रिका को दिये इंटरव्यू में कहा कि मुझे मेरी मस्जिद वापस चाहिए. ओवैसी यहीं नहीं रुके और उन्होंने उन मुसलमानों पर भी हमला बोला जो इस फैसले को सही मानते और इसका सम्मान करते हैं. वहीं आज बाबरी एक्शन कमेटी ने इस मुद्दे पर आगे की रणनीति के लिए लखनऊ में बैठक की. कमेटी के अध्यक्ष जफरयाब जिलानी ने कहा कि मस्जिद की जमीन किसी और को देने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला ग़लत है. हालांकि मुस्लिम पक्ष का ये पूरा सच नहीं है. कई मुस्लिम भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं जिसमें मामले के मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी भी शामिल हैं. 

ऐसे में सवाल है कि मंदिर-मस्जिद के नाम पर वोट बैंक का खेल कब तक? अयोध्या फैसले पर सौहार्द कौन बिगाड़ रहा है? अयोध्या फैसले पर गुमराह करने की साज़िश किसकी? सबसे पुराना विवाद ख़त्म,मौलानाओं की सियासत शुरू? 'सुप्रीम' फैसले पर देश को विश्वास, ओवैसी को 'अविश्वास'?

अयोध्या फ़ैसले पर ओवैसी ने क्या कहा?  
मुझे मेरी मस्जिद वापस चाहिए. मुझे लगता है अयोध्या पर फैसला कानून पर आस्था की जीत है. जो मुस्लिम फैसले पर सवाल नहीं उठा रहे, उन्हें मोदी ने कंट्रोल कर रखा है
अगर मस्जिद ध्वस्त नहीं की गई होती, तो भी क्या यही फैसला आता. ये दो पक्षों के बीच एक सिविल केस था, जमीन के टुकड़े की लड़ाई नहीं है. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने एमआईएम अध्यक्ष ओवैसी को करारा जवाब देते हुए कहा, "ओवैसी जी देश में माहौल खराब करना चाहते हैं. देश इसकी इजाजत नहीं देता." 

अयोध्या फ़ैसले पर मुस्लिमों में 'कहीं खुशी-कहीं ग़म'  
अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी का कहना है, "सर्वोच्च अदालत के फ़ैसला का सम्मान करते हैं, कोर्ट के इस निर्णय से बहुत बड़ा मामला हल हो गया है." AIMPLB सदस्य, जफरयाब जिलानी ने कहा, "मस्जिद की ज़मीन नहीं दे सकते, मस्जिद हमें अनमोल है इसके बदले 500 एकड़ ज़मीन भी मंजूर नहीं." AIMPLB सदस्य, कमाल फ़ारुकी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मस्जिद के बदले 100 एकड़ ज़मीन भी दे दो, कोई फायदा नहीं. हमारी 67 एकड़ ज़मीन लेकर 5 एकड़ दे देना कहां का इंसाफ है." जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मौलाना अरशद मदनी ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला समझ से परे है, अयोध्या में 5 एकड़ ज़मीन नहीं लेनी चाहिए."