Asaduddin Owaisi: वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि किसी भी नागरिक को किसी भगवान या देवता की पूजा करने के लिए कैसे मजबूर किया जा सकता है? उन्होंने ऐसी टिप्पणी क्यों की, जानते हैं.
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Asaduddin Owaisi: शीतकालीन सत्र के छठवें दिन वंदे मातरम् पर चर्चा हुई, इस चर्चा में पीएम मोदी ने जहां एक तरफ वंदे मातरम् की खूबियां गिनाई तो वहीं दूसरी तरफ उन्होंने बंगाल विभाजन सहित कई मुद्दों के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया. इस चर्चा में बोलते हुए AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि संविधान विचारों और धर्म की पूरी आजादी की गारंटी देता है. ऐसे में देशभक्ति को किसी भी धर्म या निशान से जोड़ना संवैधानिक नियमों के खिलाफ है, किसी देवी-देवता की पूजा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. इसके अलावा उन्होंने और क्या कहा जानते हैं.
नहीं किया जा सकता मजबूर
AIMIM चीफ ने कहा कि नागरिकों को किसी भी देवता के प्रति श्रद्धा दिखाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और उनसे किसी भी तरह का वफादारी सर्टिफिकेट नहीं मांगा जाना चाहिए. वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसका मतलब है मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं. एक पोस्ट में ओवैसी ने वंदे मातरम की 150वीं सालगिरह पर लोकसभा में खास चर्चा के दौरान अपने भाषण का जिक्र करते हुए लिखा, जब संविधान का पहला पेज ही सोचने, बोलने, विश्वास, धर्म और पूजा की पूरी आजादी देता है तो किसी भी नागरिक को किसी भगवान या देवता की पूजा करने या श्रद्धा से सिर झुकाने के लिए कैसे मजबूर किया जा सकता है?
तब होगा संविधान का उल्लंघन
इसके अलावा उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार इसे जबरदस्ती नहीं करेगी वह समझते हैं कि वंदे मातरम आजादी का नारा था, लेकिन अगर इसे जबरदस्ती किया गया, तो यह संविधान का उल्लंघन होगा.
मत लीजिए वफादारी का सर्टिफिकेट
इससे पहले उन्होंने कहा था कि कहा कि हम जिन्ना के पक्के विरोधी हैं इसलिए हम भारत को अपना देश मानते हैं. लेकिन 1942 में जिन राजनीतिक पूर्वजों की आप इतनी तारीफ करते हैं, उन्होंने नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस, सिंध और बंगाल में जिन्ना की मुस्लिम लीग के साथ मिलकर मिली-जुली सरकारें बनाईं और उन्हीं सरकार ने 1.5 लाख मुसलमानों और हिंदुओं को ब्रिटिश इंडियन आर्मी में भर्ती किया. ताकि वे दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों के लिए लड़ सकें. असदुद्दीन ओवैसी ने कहा 'भारत एक चमन है, जहां पर हर फूल को खिलना चाहिए. हमसे वफादारी का सर्टिफिकेट मत लीजिए. (ANI)
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