असम बना देश का एकमात्र नागरिक बजट प्रकाशित करने वाला राज्य

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है की असम देश का इकलौता राज्य है, जो बजट जागरुकता कार्यकर्म और नागरिक बजट पेश करता है.

असम बना देश का एकमात्र नागरिक बजट प्रकाशित करने वाला राज्य

गुवाहाटी: असम सार्वजनिक क्षेत्र में नागरिक बजट प्रकाशित करने में देश के 29 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में एकमात्र राज्य बन गया. ट्रांस्पेरेन्सी इंटरनेशनल की जारी रिपोर्ट में इस तथ्य की पुष्टि की गई है. रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है की असम देश का इकलौता राज्य है, जो बजट जागरुकता कार्यकर्म और नागरिक बजट पेश करता है. बता दें कि बिहार, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश, ये तीन राज्य हैं, जो बजट प्रक्रिया में नागरिकों से सुझाव मांगते हैं. ओडिशा नागरिक सुझाव के लिए वॉट्सएप, एसएमएस मैसेज, चिट्ठी और ई-मेल जैसे माध्यमों का प्रयोग करता है. वॉट्सएप और ई-मेल से भेजे लोगों के सुझावों को पसंद भी किया गया है.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बजट संबंधी दस्तावेजों को देखने और पढ़ने के नागरिकों की सुविधा के लिए अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और 1 केंद्र शासित राज्य पुडुचेरी ने बजट के लिए अलग से वेबसाइट भी लांच की है.

इस सन्दर्भ में हिमाचल प्रदेश नागरिक मोबाइल एप का प्रयोग करता है तो वहीं असम और झारखण्ड में बजट सम्बन्धी लिए निर्णयों के रिपोर्ट को जारी की जाती है. आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा ने राजकोषीय और वित्त से जुड़े तमाम जानकारियों के अलावा राज्य की सम्पूर्ण जानकारी को उपलब्ध कर लोगों तक पहुंचाने के लिए वेबसाइट बनाई है.  

2017 में आयोजित ट्रांसपेरेन्सी इंटरनेशनल के ओपन बजट सर्वेक्षण में भारत का स्थान 115 देशों के भीतर 53वां था. अब भारत बजट पारदर्शिता के मामले में 100 देशों में 48वें पायदान पर है. बजट में जन सहभागिता के बिंदु पर भारत 100 देशों में 15वें स्थान पर और बजट निरीक्षण मामले में 100  देशों में 48वें नंबर पर है.  

गौरतलब हैं कि ट्रांस्पेरेन्सी इंटरनेशनल इण्डिया के अध्यक्ष और आयकर निपटान आयोग के पूर्व अध्यक्ष एस आर बाधवा ने ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के नागरिक बजट रिपोर्ट के मुद्दे पर टिपण्णी करते हुए कहा है कि देश का दुर्भाग्य रहा है कि भारत सरकार के केंद्रीय बजट को जितना प्राथमिकता दी गई, आज तक ऐसी तरजीह देश के राज्यों के बजट को नहीं दी गई. केंद्रीय बजट को लेकर ही चर्चा और निरीक्षण होते हैं.  

एसआर बाधवा ने कहा राज्यों के बजट प्रस्तुत करने को लेकर कम पारदर्शिता अपनाने के कारण कई बार बजट नागरिकों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरें हैं. बजट और राजकोषीय मामले पर राज्य सरकारों के निर्णय नागरिकों को प्रभावित करने की क्षमता केंद्र के बजाए अधिक होती है. प्रमुख योजनाओं को लागू करने का भार राज्य सरकारों के अधीन होता है.   बाधवा ने कहा की राज्य सरकार बजट की प्रस्तुति को महत्व देते हुए महत्वपूर्ण  चर्चा का विषय बनाना चाहिए.

आपको बता दें कि‍ असम विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हो गया है. राज्य सरकार पिछले कई दिनों से लगातार हर जिले के जिलाधीशों और नागरिकों के साथ लगातार बैठक कर बजट पर सुझाव ले रही है. असम विधानसभा के इस बजट सत्र में 16 फ़रवरी को राज्य का बजट पेश होने वाला है.

असम के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार हृषिकेश गोस्वामी ने ट्रांस्पेरेन्सी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में असम को देश भर में एकलौता नागरिक बजट प्रकाशित करने वाला राज्य घोषित करने पर खुशी जाहिर करते हुए इसके लिए राज्य के नागरिकों को श्रेय देते हुए अभिनन्दन किया है. वहीं असम के  व‍ि‍त्‍त मंत्री डॉ. हिमंता विश्व सरमा ने राज्यवासियों को बजट प्रस्तुति में दिखाई रुचि‍ और सहभागिता के लिए धन्यवाद देते हुए आभार प्रकट किया.