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अमेरिका में पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान सौर तूफान का अध्ययन करेंगे खगोलविद

एस्ट्रोनामिकल सोसाइटी आफ इंडिया के लोकसम्पर्क और शिक्षा समिति के अध्यक्ष निरूज रामानुजम ने कहा, ‘‘ सूर्य ग्रहण के दौरान जब सौर कोरोना सामने आता है और इस दौरान सौर तूफान उत्पन्न होता है, तब सूर्य से काफी मात्रा में विकिरण और कई तरह के कण निकलते हैं . इसका प्रभाव काफी मजबूत होता है. ’

अमेरिका में पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान सौर तूफान का अध्ययन करेंगे खगोलविद
ओरेगन से लेकर साउथ कैरोलिना तक घुप्‍प अंधेरा छाने का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है (फाइल फोटो)

नयी दिल्ली: अमेरिका में एक दशक बाद आज पूर्ण सूर्यग्रहण पड़ रहा है और ऐसे में सौर कोरोना और सौर तूफान के अध्ययन के लिये नासा के अलावा भारतीय खागोल वैज्ञानिक पूरी तरह से तैयार हैं . सूर्य ग्रहण के दौरान उत्पन्न होने वाले सौर तूफान के कारण दूर संचार व्यवस्था और उपग्रहों को नुकसान होने की आशंका बनी रहती है और इस सूर्य ग्रहण के दौरान वैज्ञानिक इन सभी आयामों का अध्ययन करेंगे.

एस्ट्रोनामिकल सोसाइटी आफ इंडिया के लोकसम्पर्क और शिक्षा समिति के अध्यक्ष निरूज रामानुजम ने कहा, ‘‘ सूर्य ग्रहण के दौरान जब सौर कोरोना सामने आता है और इस दौरान सौर तूफान उत्पन्न होता है, तब सूर्य से काफी मात्रा में विकिरण और कई तरह के कण निकलते हैं . इसका प्रभाव काफी मजबूत होता है. ’’ उन्होंने बताया कि कई बार इसका प्रभाव दो दिनों तक रहता है . इससे दूरसंचार व्यवस्था और अंतरिक्ष में उपग्रहों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. इससे दूर संचार व्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है.

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रामानुजम ने कहा, ‘‘ सौर तूफान के अध्ययन के माध्यम से हम सौर तूफान के प्रभावों के बारे में आंकड़ों का विश्लेषण करते हैं और इसका पूर्वानुमान लगाने का प्रयास करते हैं.’’ उल्लेखनीय है कि अमेरिका में एक दशक बाद पूर्ण सूर्य ग्रहण पड़ने वाला है. 21 अगस्‍त को सूर्य और पृथ्‍वी के बीच से चंद्रमा गुजरेगा. जिसकी वजह से सूर्य छिप जाएगा और सिर्फ इसका बाह्य हिस्‍सा यानि कोरोना आसमान में नजर आएगा. ओरेगन से लेकर साउथ कैरोलिना तक घुप्‍प अंधेरा छाने का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है.

इंडियन इंस्टीट्यूट आफ एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर आफ एक्सेलेंस इन स्पेस सोसाइटी आफ इंडिया के प्रमुख दिव्येदू नंदी ने कहा कि भारतीय खगोलविदों का दल अमेरिका के सूर्य ग्रहण के दौरान सौर कोरोना के बारे में पूर्वानुमान व्यक्त करने में सक्षम है.हमारे देश के वैज्ञानिकों की इस सूर्य ग्रहण के दौरान सौर तूफान पर भी नजर रहेगी.

अमेरिकी सौर ग्रहण में फूल जैसी संरचना बनने का अनुमान

आईआईएसईआर-कोलकाता की अगुवाई वाली भौतिकविदों के एक दल ने कहा कि पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य के करोना को अमेरिका के खगोलविद सोमवार को 'ग्रेट अमेरिकन सोलर इक्लिप्स' के दौरान फूल जैसी संरचना के रूप में देख पाएंगे. शोधकर्ताओं का कहना है कि सूर्य की करोना जैसी आकृति वाली संरचना व इसकी चुंबकीय क्षेत्र की डॉयग्नोस्टिक की पहुंच उपग्रह के लिए अंतरिक्ष के मौसम संबंधी पूर्वानुमान व जीपीएस संचालन के लिए महत्वपूर्ण होंगे.

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ग्रहण पूरे अमेरिकी प्रायद्वीप दिखाई देगा. यह 99 सालों में पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण है.सूर्य गैसों के एक आवरण से घिरा है जिसे वातावरण कहते हैं. करोना सूर्य के वातावरण का बाहरी हिंस्सा होता है.करोना अक्सर सूर्य के सतह के तेज प्रकाश की वजह से छिपा रहता है. इससे यह बिना विशेष उपकरण के दिख पाना मुश्किल होता है. हालांकि, करोना को पूर्ण सूर्यग्रहण के दौरान देखा जा सकता है.

भारतीय विज्ञान शिक्षा व अनुसंधान संस्थान कोलकाता के सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन स्पेश साइंस इंडिया (सीईएसएसआई)के सौर भौतिकविद और दुरहम विश्वविद्यालय के जानकारों ने दो प्रमुख हेलमेट स्ट्रीमर्स (यह पत्ती की तरह की चुंबकीय क्षेत्र से करीब नुकीली संरचनाएं होती हैं) की मौजूदगी का अनुमान लगाया है.