एल्युमीनियम को लेकर यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सूबे की बीजेपी सरकार पर जोरदार हमला बोला. लेकिन अचानक ऐसा क्या हो गया, जो एल्युमीनियम को लेकर सियासत गरमा गई.
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Aluminium Utensils: उत्तर प्रदेश की सियासत इन दिनों एक अलग ही मामले पर गरमाई हुई है. यह है एल्युमीनियम के बर्तन में खाना बनाने को लेकर. दरअसल, पिछले दिनों लगातार उत्पीड़न से तंग आकर उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में चाय बेचने वाले एक शख्स ने अपना धंधा बंद कर दिया है. दरअसल, शेषमणि यादव का कहना है कि जब अखिलेश यादव उनकी दुकान पर चाय पीने आए. उसके बाद से उनको परेशान किया जा रहा है.
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने 1 अप्रैल को इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम (IGRS) पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद, 15 अप्रैल को शेषमणि यादव के स्टॉल का निरीक्षण किया और लैब में जांच के लिए चाय की पत्तियों के सैंपल लिए.
चीफ फूड सेफ्टी ऑफिसर राजेश दीक्षित ने कहा कि यह कार्रवाई शिकायत के आधार पर की गई थी. उन्होंने कहा, 'आगे के कदम लैब टेस्ट के नतीजों पर निर्भर करेंगे. अगर तय मानकों का पालन नहीं पाया जाता है, तो दुकान के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है.'
दुकान के मालिक के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने चाय बनाने के लिए एल्युमीनियम के बर्तनों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे. हालांकि, अधिकारियों ने इस आरोप पर कोई जवाब देने से इनकार कर दिया.
अब इस घटना पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने प्रदेश की बीजेपी सरकार पर हमला बोल दिया. उन्होंने बकायदा ट्वीट भी किया, जिसमें उन्होंने कुकर की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, 'एक गरीब चायवाले को एल्युमीनियम का बर्तन इस्तेमाल करने पर सरकारी विभाग और भाजपाइयों के गुर्गों के जरिए प्रताड़ित किया जा रहा है, तो क्या दुनिया के बड़े ब्रैंड्स के बर्तन-कुकर बेचने या घरों में रखने पर भी छापेमारी होगी?
और हां ये भी दिखवा लीजिए कि जब आपके यहां खिचड़ी बनती है तो उसका बर्तन कहीं एल्युमीनियम का तो नहीं है या फिर उसको भी सोने में ढलवा लिया है.
अखिलेश यादव ने इसके बाद दुकान के मालिक के बेटे से मुलाकात की और कहा कि वह उनके साथ खड़े हैं और पार्टी सुनिश्चित करेगी कि उनको न्याय मिले.
खैर ये तो बात हुई सियासत की. लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं कि एल्युमीनियम के बर्तनों में खाना बनाने के क्या फायदे और क्या नुकसान होते हैं.
फायदों की बात करें तो एल्युमीनियम स्टेनलेस स्टील की तुलना में लगभग 15 गुना बेहतर तरीके से हीट का संचालन करता है. यह जल्दी गर्म हो जाता है और हीट को पूरी सतह पर समान रूप से फैला देता है, जिससे ऐसे 'हॉट स्पॉट्स' बनने से बचाव होता है जो भोजन को जला सकते हैं.
दूसरा फायदा है कि एल्युमीनियम में कम एनर्जी की जरूरत होती है और जितना गर्म होना चाहिए, उस हीट पर यह जल्दी पहुंच जाता है, जिससे बचत होती है.
लोहे या स्टेनलेस स्टील की तुलना में यह हल्का होता है. उठाने और पलटने में भी आसानी रहती है, अगर ज्यादा खाना पकाया जा रहा हो तब भी.
चूंकि एल्युमीनियम आमतौर पर दूसरे धातुओं की तुलना में ज्यादा किफायती होता है, जिससे हाई परफॉर्मेंस वाले कुकवेयर घरों में नजर आते हैं.
अब आपको बताते हैं कि एल्युमीनियम के बर्तन में खाना पकाने के क्या नुकसान हैं.
एल्युमीनियम के बर्तनों में खट्टी या नमकीन चीजें पकाने से धातु खाने में मिल सकती है. जरूरत से ज्यादा अगर खाना एल्युमीनियम के बर्तनों में बनाया जाता है तो इससे स्वास्थ्य से जुड़ी कई दिक्कतें जैसे न्यूरोलॉजिकल और हड्डियों से जुड़ी समस्या हो सकती है.
एसिडिक और एल्कलाइन फूड्स के साथ एल्युमीनियम रिएक्शन कर सकता है. इससे खाने में लोहे जैसा स्वाद महसूस हो सकता है या फिर खाने का फ्लेवर बदल सकता है.
कई स्टडीज में कहा गया कि ज्यादा समय तक एल्युमीनियम के बर्तनों में खाना बनाया जाए तो एल्जाइमर की बीमारी और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर हो सकते हैं. हालांकि इस खोज की पुष्टि करने के लिए और रिसर्च की जरूरत है. लेकिन इस वजह से लोगों में चिंता जरूर बढ़ गई है.
जब एल्युमीनियम कुकवेयर को ज्यादा टेंपरेचर पर रखा जाता है या एसिडिक फूड बनाया जाता है तो उसका रंग तक बदल जाता है.