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Bharat Bandh: देशभर में आज ( बुधवार 9 जून 2025) किसान संगठनों और ट्रेड यूनियनों के एक समूह की ओर से राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत भारत बंद का आयोजन किया गया है. इस विरोध प्रदर्शन का मकसद सरकार की नीतियों का विरोध करना है. अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस हड़ताल में 25 करोड़ से ज्यादा श्रमिक शामिल हो सकते हैं, जिसमें हीमा, डाक, बैंकिंग, राज्य परिवहन और कोयला खनन के कर्मचारी शामिल हैं. हड़ताल के कारण आज कई सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.
आज क्या बंद रहेगा और क्या खुला रहेगा?
बैंकिंग सेवाएं: वैसे तो बैंकों की ओर से आज अवकाश की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA) जैसे बैंक कर्मचारी यूनियनों की ओर से हड़ताल में शामिल होने की पुष्टि की गई है, जिससे देश भर में चेक क्लीयरेंस और नकद लेन-देन जैसी बैंकिंग सेवां प्रभावित हो सकती हैं.
शैक्षणिक संस्थान: भारत बंद को लेकर आज स्कूल-कॉलेज जैसे शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं दिया गया है. ऐसे में इनके सामान्य रूप से संचालित होने की संभावना है.
बिजली आपूर्ति: देशभर में आज बड़ी संख्या में पावर सेक्टर के कर्मचारी हड़ताल में शामिल होंगे. ऐसे में बिजली आपूर्ति में रुकावट आ सकती है. माना जा रहा है कि इस सेक्टर से जुड़े 27 लाख से ज्यादा कर्मचारी भारत बंद में शामिल होंगे.
रेलवे में रुकावट: वैसे तो रेलवे यूनियनों की ओर से भारत बंद में शामिल होने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसके संचालन में देरी या अन्य तरह के मामूली व्यवधान की संभावना है.
परिवहन: देशभर के कई शहरों में सड़क यात्रा और बसों, टैक्सियों, ऐप वाली कैब जैसे सार्वजनिक परिवहनों में रुकावट या देरी की समस्या हो सकती है. यूनियनों के सड़क पर विरोध मार्च के कारण ये समस्या हो सकती है. ऐसे में रूट डायवर्जन हो सकता है. वहीं यात्रियों को लंबी यात्रा करनी पड़ सकती है. केरल के परिवहन मंत्री केबी गणेश कुमार के मुताबिक इस हड़ताल का केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यूनियनों की ओर से हड़ताल को कोई ऑफीशियल नोटिस नहीं मिला है, हालांकि ट्रेड यूनियनों ने इसका विरोध जताया है. ऐसे में केरल में बस सेवाओं में थोड़ी समस्या आ सकती है.
क्यों हो रहा भारत बंद?
बता दें कि भारत बंद को लेकर यूनियनों ने आरोप लगाया है कि सरकार पिछले 10 सालों से वार्षिक श्रम सम्मेलन का ओयजन नहीं कर रही है. वहीं उनका कहना है कि मौजूदा आर्थिक नीतियां महंगाई, बेरोजगारी और मजदूरी में गिरावट ला रही हैं. ट्रेड यूनियनों के मुताबिक सरकार की ये नीतियां युवाओं के भविष्य के लिए खतरा बन रही हैं. देश की 65 प्रतिशत आबादी 35 से कम साल की है, लेकिन 20-25 साल की उम्र के लोग सबसे ज्यादा बेरजोगार हैं. यूनियनों का ये भी आरोप है कि सरकार की नीतियां किसानों और श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं.