बड़ा सवाल: उपद्रवी' जामिया के छात्र कैसे, क्या 'नकाबपोशों' को माला पहनाती पुलिस?

 क्या हाथों में पत्थर, मुंह पर नकाब पहने लाइब्रेरी में बैठे उपद्रवी छात्र हो सकते हैं.

बड़ा सवाल: उपद्रवी' जामिया के छात्र कैसे, क्या 'नकाबपोशों' को माला पहनाती पुलिस?

नई दिल्ली: बसो में आग लगाओ, थानों को जलाओ, पुलिस पर पेट्रोल बम बरसाओ और लाइब्रेरी में छिप जाओ और फिर 'छात्र' कहलाओ! और फिर उन पत्थरबाज नकाबपोश उपद्रवियों की पुलिस को आरती उतारनी चाहिए नहीं तो पुलिस को बर्बर आतंकी कहा जाएगा लेकिन आप ये सोचिए. हाथों में पत्थर, मुंह पर नकाब पहने लाइब्रेरी में बैठे उपद्रवी क्या छात्र हो सकते हैं. जामिया को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने जो वीडियो जारी किया है, अधूरा वीडियो है जिसके जरिये पुलिस को जुल्मी बताकर पुलिस की बर्बरता पर सवाल उठाए जा रहे हैं लेकिन बिना सच जाने पूरा वीडियो देखे पुलिस को गुंडा आतंकी तक बता डाला गया. फिर सामने आया पूरा वीडियो. अधूरे वीडियो के आगे और पीछे का हिस्सा जिसके सामने आने के बाद पुलिस को जुल्मी क्रूर बताने वाला गैंग ना जाने किस बिल में छिप गया है. 

जामिया हिंसा के वीडियो का पूरा 'सच'
2 दिनों में जामिया हिंसा के 5 अलग-अलग वीडियो वायरल हुए. पहले वीडियो में लाइब्रेरी में छात्रों की पिटाई का हिस्सा दिखाया गया. एक वीडियो में छात्र चेहरे पर नकाब बांध कर लाइब्रेरी में घुसे. वीडियो में एक छात्र के हाथ में पत्थर दिख रहा है. रीडिंग रूम के दरवाजे को छात्रों ने बेंच लगाकर बंद किया. पुलिस लाइब्रेरी में मौजूद सभी छात्रों को पीटती दिख रही है. छात्रों को पीटने वाले पुलिस के जवानों ने भी नकाब बांध रखा था. 

देखें वीडियो:  

जामिया हिंसा के वीडियो पर 5 बड़े सवाल
हिंसा का वीडियो 2 महीने के बाद क्यों जारी हुआ? हिंसा वाले वीडियो को क्यों और किसने एडिट किया? जामिया की लाइब्रेरी में घुसने पर पुलिस ने झूठ क्यों बोला? क्या ये सारे वीडियो दिल्ली पुलिस के पास पहले से थे? जामिया प्रशासन वीडियो की सत्यता पर चुप क्यों है? 

बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्‍हा राव का कहना है कि पुलिस के खिलाफ आवाज उठाना, पुलिस को दोषी ठहराना, जो देश की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं. उनके पक्ष में लगातार बोलना ये कांग्रेस पार्टी की आज नीति रह गई है. वहीं, AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने झूठ कहा सरकार ने झूठ कहा कि पुलिस जामिया में दाखिल नहीं हुई. वो सीसीटीवी फुटेज से साबित हो गया है कि दिल्ली पुलिस ना सिर्फ जामिया में दाखिल हुई बल्कि रीडिंग रूम में भी गई.