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Bihar Election 2025 Results: बूथ से लेकर सीट तक, हर जगह NDA का जलवा; जानिए जीत के 5 बड़े कारण

Bihar Assembly Election Result 2025: साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बिहार की आधी आबादी यानि कि महिलाओं का पूरा साथ मिला है. बिहार चुनाव में नीतीश का वो दांव जिसमें महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये देकर महिलाओं का भरोसा जीत लिया था. बिहार की महिलाओं ने भी इसी वजह से एनडीए पर भरोसा जताया. 

Bihar Election 2025 Results: बूथ से लेकर सीट तक, हर जगह NDA का जलवा; जानिए जीत के 5 बड़े कारण

NDA Win Bihar Assembly Election Result: बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NBT) ने फिर से परचम लहराया है. चुनाव आयोग के शुरुआती रुझानों में एनडीए ने लगभग 200 सीटों पर बढ़त हासिल कर ली है. चुनाव आयोग के रुझानों के अनुसार, बीजेपी ने दोपहर 01:15 मिनट तक 90 सीटों पर बढ़त बनाए रखी, जो बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. इसके अलावा बीजेपी की सहयोगी जेडीयू 81 सीटों पर आगे चल रही है. एनडीए के अन्य घटक दलों में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 21, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को पांच और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 सीटों पर बढ़त मिली. बस अब इन रुझानों को नतीजों में तब्दील होने की देरी है. इसके साथ ही यह बिहार में NDA की 2010 के बाद दूसरी सबसे बड़ी जीत होगी.

इसके पहले साल 2010 में बीजेपी के नेतृत्व एनडीए ने 206 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसमें से जेडीयू ने 115 तो बीजेपी ने 91 सीटों पर जीत हासिल की थी. इस चुनाव में आरजेडी गठबंधन को महज 25 सीटों पर जीत मिली थी. इसमें से आरजेडी ने अकेले 22 सीटें जीती थीं और लोकजनशक्ति पार्टी को महज 3 सीटों पर जीत मिली थी. आइए आपको बताते हैं इस बार के चुनाव में एनडीए गठबंधन की जीत के वो पांच बड़े कारण जिसकी वजह से बिहार में एक बार फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनाने जा रही है. 

मोदी-नीतीश के वादों पर जनता को भरोसा
इस बार बिहार की जनता ने मोदी-नीतीश की जोड़ी के उन वादों पर फिर से भरोसा किया है जो उन्होंने आचार संहिता से पहले बिहार की जनता से किए थे. मोदी-नीतीश की लाभकारी योजनाओं की बरसात ने एक बार फिर से बिहार की जनता को अपनी ओर खींचा है. दोनों नेताओं की लाभकारी योजनाओं के साथ समग्रता में विकास की बात को जाता है. इतना ही नहीं बिहार की जनता ने नीतीश के खराब स्वास्थ्य को भी नकार दिया. इस मामले में विपक्ष ने लगातार कैंपेन चलाया कि एक अस्वस्थ शख्स को बिहार की जनता नकार दे लेकिन जनता ने नीतीश को एक बार फिर से हाथों हाथ लिया और NDA को जमकर वोटिंग की.  

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NDA को मिला आधी आबादी का साथ
साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बिहार की आधी आबादी यानि कि महिलाओं का पूरा साथ मिला है. बिहार चुनाव में नीतीश का वो दांव जिसमें महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये देकर महिलाओं का भरोसा जीत लिया था. बिहार की महिलाओं ने भी इसी वजह से एनडीए पर भरोसा जताया. नीतीश सरकार ने बिहार की लगभग एक करोड़ तीस लाख महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपए डालकर उन्हें स्टार्टअप शुरू करने का जो संदेश दिया था उसे बिहार की महिलाओं ने हाथों हाथ लिया. इसके अलावा आशा, ममता और जीविका के बढ़े मानदेय ने भी महिलाओं का भरोसा जीता. नीतीश सरकार की शराब बंदी, छात्रों को स्कॉलरशिप के अलावा नगर निगम चुनाव और पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 फीसदी की छूट के बाद महिलाओं का आशीर्वाद नीतीश कुमार पर जमकर बरसा. 

मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ 125 यूनिट फ्री बिजली का वादा
बिहार विधानसभा चुनाव के मौके पर नीतीश कुमार ने जनता को 125 यूनिट फ्री बिजली देने का जो वादा किया वो जाति और धर्म से ऊपर उठकर था. इस ऐलान ने बीजेपी की टैग लाइन सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास को एकदम शब्दशः चरितार्थ कर दिया. ये बिहार चुनाव में एनडीए के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ. नीतीश कुमार के इस वादे ने महागठबंधन के सत्ता में आने के मुंगेरी लाल के हसीन सपनों को चकनाचूर कर दिया. इसके अलावा एनडीए की सरकार ने विभिन्न योजनाओं के जरिए लगभग चार करोड़ लाभार्थियों का ग्रुप बनाया. ये ग्रुप एनडीए के लिए विनिंग प्लेटफार्म बना. सभी लाभार्थियों ने दिलखोलकर एनडीए को वोट किया. 

NDA की जीत में 5 पांडवों की बड़ी भूमिका
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की जीत में उन पांच पांडवों की भूमिका साफ नजर आई जिन्होंने अपने-अपने परंपरागत वोटरों के वोट बैंकों पर सही समय पर पकड़ बनाई. आइए आपको बताते हैं कि बिहार में एनडीए की जीत में वो पांच पांडव कौन हैं. BJP, JDU, HAM, RLM और LJP राम विलास पासवान.  एनडीएक के इन पांच पांडवों ने अपनी सोशल मीडिया इंजीनियरिंग के जरिए महागठबंधन के हर दांव को चित्त कर दिया. आपको बता दें कि बिहार में जातिवाद के आधार पर सियासी पार्टियां बनती हैं. यही वजह है कि जीत के इस गठबंधन के लिए सियासत की शुरुआत बिहार से हुई. एनडीए के पांच पांडवों ने अपनी कुशल नीतियों से विद्रोहियों को भी अपना दोस्त बना लिया जिसका असर हमने इस चुनाव परिणाम में दिखाई दिया.  

बेहतरीन बूथ मैनेजमेंट और सहयोगियों से सीट शेयरिंग
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान एनडीए ने बेहतरीन बूथ प्रबंधन किया जिसकी वजह से वो लगातार पूरे चुनाव में महागठबंधन पर हावी रहा. वहीं एनडीए ने सहयोगी पार्टियों के साथ सीट शेयरिंग का बेहतरीन तरीका चुना और हर पार्टी को खुश रखते हुए उनसे सीटें साझा की. वहीं महागठबंधन के बूथ मैनेजमेंट की बात करें तो उनके एजेंट भी बूथों से गायब रहे जिसकी वजह से महागठबंधन के वोटरों को चुनाव में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और बहुत से वोटर बिना वोट किए ही वापस लौट गए.  वहीं जब सीटों की शेयरिंग को लेकर महागठबंधन में मारा-मारी चल रही थी तभी एनडीए ने सीट शेयरिंग का ऐलान कर यहां पर भी बाजी मार ली थी. 

यह भी पढ़ेंः शाह-नीतीश के आंकड़े भी हुए फेल, सिर्फ इस शख्स ने बताए थे बिहार के सबसे सटीक आंकड़े

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Ravindra Singh

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