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गिरिडीह: भेलवाघाटी नरसंहार को याद कर आज भी सिहर जाते हैं लोग, नक्सलियों ने की थी 17 लोगों की हत्या

माओवादियो ने गांव के बीच चौराहे पर ही खून की होली खेलकर ग्राम रक्षा दल के सदस्यों की जमकर पिटाई करने के बाद किसी को गोली मारकर तो किसी की गला रेतकर हत्या कर दी थी.

गिरिडीह: भेलवाघाटी नरसंहार को याद कर आज भी सिहर जाते हैं लोग, नक्सलियों ने की थी 17 लोगों की हत्या
नक्सलियों ने किया था नरसंहार.

मृणाल सिन्हा, गिरिडीह: झारखंड के गिरिडीह (Giridih) के भेलवा घाटी नरसंहार के 14 साल बीत जाने के बाद आज भी लोगों में खौफ कायम है. 11 सितंबर 2005 की उस काली रात को याद कर आज भी लोग सिहर जाते हैं. उस काली रात को नक्सलियों (Maoist) ने हमला कर 17 लोगों की हत्या कर दी थी. ग्रामीणों का कसूर बस इतना था कि उन्होंने नक्सलियों से लोहा लेने के लिए गांव में ग्राम रक्षा दल का गठन किया था.

बताया जाता है कि इलाके में नक्सल गतिविधि को पनपते देख नक्सलियों से लोहा लेने के लिए गांव में ग्राम रक्षा दल का गठन किया गया था. ग्राम रक्षा दल के सदस्य गांव में रतजगा कर नक्सलियों को गांव में घुसने नहीं देना चाहते थे, जिससे नक्सली नाराज चल रहे थे.

नाराज नक्सलियों ने 11 सितंबर 2005 को पूरे भेलवाघाटी गांव को घेर लिया. गांव के घरों की कुंडियों को बंद कर दिया. इसके बाद ग्राम रक्षा दल के सदस्यों को एक-एक कर घर से बाहर निकालकर गांव के बीच चौराहे पर जनअदालत लगाई गई. जनअदालत में ग्राम रक्षा दल के सदस्यों को मौत की सजा देने का फरमान जारी किया गया.

ग्रामीणों ने बताया कि उस रात माओवादियो ने गांव के बीच चौराहे पर ही खून की होली खेलकर ग्राम रक्षा दल के सदस्यों की जमकर पिटाई करने के बाद किसी को गोली मारकर तो किसी की गला रेतकर हत्या कर दी थी. उस घटना के साक्षी लोगों का दिल मौत के उस मंजर को देखकर आज भी दहल उठता है. नक्सलियों ने मृतक मंसूर के घर को बम से उड़ा दिया था, जिसमें कई लोग मारे गए थे. भेलवाघाटी नरसंहार के 14 साल हो गए हैं. बावजूद ग्रामीणों के जेहन से उस स्याह रात की सिहरन खत्म नहीं हो रही है.