पटना में 58 सालों के ठंड का रिकार्ड टूटा, विपक्ष ने अलाव के नाम पर घोटाले का लगाया आरोप

बर्फीली हवाओं ने लोगों की मुश्किलें और बढा दी हैं. बीते 58 सालों में ऐसी ठंढ पहली बार दिख रही है. शनिवार की रात पटना का न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा. 

पटना में 58 सालों के ठंड का रिकार्ड टूटा, विपक्ष ने अलाव के नाम पर घोटाले का लगाया आरोप
शनिवार की रात पटना का न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा. ()

पटना: बिहार के पटना भीषण ठंड की चपेट में आ चुका है. बर्फीली हवाओं ने लोगों की मुश्किलें और बढा दी हैं. बीते 58 सालों में ऐसी ठंड पहली बार दिख रही है. शनिवार की रात पटना का न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा. वहीं, गया में न्यूनतम तापमान 3.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया. मौसम विभाग ने 3 जनवरी तक को बिहार के लिए कोल्ड डे घोषित कर दिया है. यानी न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस या उससे कम रहेगा.

ठंड के मद्देनजर पटना में जिला प्रशासन की तरफ से 98 जगहों पर अलाव की व्यवस्था का दावा किया गया है. लेकिन पड़ताल में ज्यादातर जगहों पर अलाव नजर नहीं आए. फुटपाथ पर रहनेवाले लोगों ने भी कहा की उन्हें सरकार की ओर से न तो अलाव की सुविधा मिली और न ही कंबल मिला.

अब जरा ठंड से बचाव को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग के आंकडों पर गौर कीजीए. 27 दिसंबर तक जारी किए गये आंकडों के मुताबिक पटना में 117 जगहों पर अलाव जलाये जा रहे हैं. ठंड में अबतक 28 हजार 827 किलो लकडियां अलाव के रुप में जलाई जा चुकी हैं. विभाग की ओर से अलाव के लिए पटना जिले को केवल 2 लाख रुपये ही आवंटित किए गए हैं.

जिसमें से जिला प्रशासन ने 2 लाख 42 हजार रुपये के अलाव जला दिया हैं. जबकि कंबल वितरण की कोई जानकारी विभाग को नहीं. जिला प्रशासन ने शीतलहर की चपेट में आनेवाले लोगों की संख्या 25 हजार 115 अनुमानित की है. ये ऐसे लोग हैं जिन्हें अलाव की आवश्यकता है.

विपक्ष सरकार पर अलाव के नाम पर घोटाले का आरोप लगा है. आरजेडी नेता सुबोध राय ने कहा है कि पटना की बात छोड़ दीजिए पूरे बिहार में कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं है. अलाव के नाम पर पैसे का घोटाला हो रहा है. गरीब ठंड में ठिठुर रह है और सरकार को कोई परवाह नहीं.

बीजेपी नेता रामेश्वर चौरसिया ने भी कहा है कि सरकार को गरीबों का ध्यान रखना चाहिए. जितने अलाव की आवश्यकता हो सरकार को करनी चाहिए. क्योंकि ये व्यवस्था सरकार के लिए काफी छोटी बात है.

बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व्यासजी भी अलाव की व्यवस्था को लेकर प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह देते हैं. कभी आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव रह चुके व्यास जी बताते हैं कि सरकार की ओर से अलाव कंबल के लिए पर्याप्त राशी कि व्यवस्था की जाती रही है. लेकिन जिलों के डीएम को मामले में सचेत रहने की जरुरत है. व्यासजी ने सभी डीएम से अपील भी की है कि वो जबतक सडकों पर उतरकर अलाव की मॉनिटरिंग नहीं करेंगे तब तक व्यवस्था सही नहीं होगी.

मंत्री नीरज कुमार ने भी कहा है कि सरकार की ओर से अलाव और कंबल के लिए पर्याप्त राशी दी जा रही है. अगर कहीं किसी को अलाव को लेकर परेशानी हो रही है तो वो शिकायत कर सकते हैं. सरकार मामले पर संज्ञान लेगी. गौरतलब है कि पूरे बिहार में अबतक 1154 जगहों पर अलाव जलाये जा रहे हैं. 98 हजार 529 टन लकडियां अलाव के रुप में जलायी जा चुकी हैं. 

विभाग की ओर से अलाव के लिए 49 लाख रुपये दिये गये हैं. जबकि 57 लाख 62 हजार रुपये जिलों के जिला प्रशासन ने खर्च कर दिये हैं. सिर्फ मधुबनी जिले में 50 कंबल बांटे गये हैं. दूसरे जिलों में कंबल वितरण की शुरुआत तक नहीं की जा सकी है.