रांची : बकरी बेचकर 'आयुष्मान भारत' का कार्ड बनवाने पहुंचा एक परिवार

घर में मौजूद बकरी को बेचकर पैसा मिला तो तीसरे दिन भी सदर अस्पताल में बने आयुष्मान भारत योजना के काउंटर पर पहुंचा. 

रांची : बकरी बेचकर 'आयुष्मान भारत' का कार्ड बनवाने पहुंचा एक परिवार
मीडिया की मदद से मिला आयुष्मान भारत का कार्ड.

रांची : प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) का कार्ड बनवाने के लिए एक परिवार काफी परेशानियों से जूझना पड़ा. आर्थिक तंगी में उसने घर की एक बकरी भी बकरी भी बेच दी, बावजूद उसे निराशा हाथ लगी थी. बांस की बैसाखी के साहारे नामकुम के एक ही परिवार के दो सदस्य पिछले तीन दिनों से गोल्डेन कार्ड बनवाने के लिए चक्कर लगा रहे थे.

नामकुम प्रखंड के गरसुल गांव का रहने वाला चंपा तिर्की अपने पिता मंगरा तिर्की और बेटा संग्राम तिर्की के इलाज के लिए परेशान था. घर से अस्पताल और अस्पताल से घर का चक्कर लगाते-लगाते उसके पैसे खत्म हो गए. घर में मौजूद बकरी को बेचकर पैसा मिला तो तीसरे दिन भी सदर अस्पताल में बने आयुष्मान भारत योजना के काउंटर पर पहुंचा. लेकिन वहां मौजूद कर्मचारी भर्ती होने के बाद ही कार्ड बनाने की बात करता रहा.

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मंगरा तिर्की की उम्मीदों पर पानी फिर गया था. उसे चिंता सताने लगी था कि आखिरकार बेटे और पिता का इलाज कैसे हो पाएगा. पैसे की चिंता और निराश मन से सदर अस्पताल से बाहर निकल घर जाने लगा, लेकिन मीडिया के कैमरे पर नजर पड़ते ही एक बार फिर उसकी उम्मीद जगी. तीन दिन के प्रयास का फल मात्र दस मिनट में गोल्डन कार्ड बनकर हाथों में आ गया.

बहरहाल मंगरा तिर्की के आयुष्मान की उम्मीदों पर पानी फिरने से बच गया और एक ही परिवार का 2 सदस्य को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) का गोल्डन कार्ड का लाभ मिला. मंगरा तिर्की के इस परिवार को उम्मीद है कि अब बेटे और पिता का बेहतर इलाज हो पाएगा और दोनों ही अपने पैरों पर फिर से चल सकेंगे.