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झारखंड: हजारीबाग के किसान ने स्कूटर के इंजन से बनाया हल, किसानों में दिख रहा क्रेज

हजारीबाग से लगभग 40 किलोमीटर दूर उचाघना गांव के टाटीझरिया प्रखंड में पड़ने वाले यह गांव आज सुर्खियों में है. अभाव से परेशानियों के बाद इससे निपटने के लिए जुगाड़ कर इसे बनाया गया. 

झारखंड: हजारीबाग के किसान ने स्कूटर के इंजन से बनाया हल, किसानों में दिख रहा क्रेज
बेकार पड़े स्कूटर के इंजन की सहायता से बनाए गए इस हल ने पूरे इलाके में धूम मचा दी है.

यादवेंद्र सिंह, हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग के टाटीझरिया इलाके के ऊंचाघाना गांव के किसान ने जुगाड़ कर टेक्नोलॉजी से एक हल बनाया है. बेकार पड़े स्कूटर के इंजन की सहायता से बनाए गए इस हल ने पूरे इलाके में धूम मचा दी है.

हजारीबाग से लगभग 40 किलोमीटर दूर उचाघना गांव के टाटीझरिया प्रखंड में पड़ने वाले यह गांव आज सुर्खियों में है. अभाव से परेशानियों के बाद इससे निपटने के लिए जुगाड़ कर इसे बनाया गया. हजारीबाग के महेश करमाली भी कमाने के लिए चेन्नई गए थे. बजाज के एक वर्कशॉप काम भी करते थे लेकिन हाई स्कूल पास नहीं होने के लिए उन्हें वहां स्थाई नौकरी नहीं मिली. 

 

इसके बाद वो घर वापस लौट गए. गांव में जमीन तो थी लेकिन बैल नहीं थी. बैल खरीदने के लिए पचास हजार से अधिक पैसों सकी जरूरत थी. काफी उधेड़बुन के बाद के बाद उन्होंने एक सेकेंड स्कूटर खरीदा और अपने दोस्त के घर कुछ बदलाव कर पांच-छह हजार रूपयों में स्कूटर के इंजन से हल बना डाला. 

महेश करमाली की इस सफलता से उनकी पत्नी बेहद खुश हैं. वो कहती हैं कि अब खेती में आसानी होगी. कम पैसों में पूरे खेतों की जुताई हो जाती है. समय भी बचता है जिससे बच्चों को भी पढ़ाने में समय दे पाती हैं. अब हालात ऐसे हैं कि आसपास के कई किसान इसे खरीदने के लिए इच्छुक हैं क्योंकि ट्रैक्टर और हल-बैल की तुलना में यह बहुत सस्ता है. 

महेश करमाली ने झारखंड के पहाड़ी इलाके के लिए एक अच्छी तकनीक विकसीत की है. अगर ऐसे प्रयासों को सरकारी लाभ मिले तो कई और किसानों को फायदा मिल सकता है.