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बिहार: अपर मुख्य सचिव आमिर सुब्हानी ने कबूला, राज्य में उच्च शिक्षा की बुरी हालत

तकनीकि शिक्षा की एहमियत को समझाने के लिए अपर मुख्य सचिव ने तो ये भी कह दिया कि बिहार के सरकारी दफ्तरों में क्लर्क का काम कंप्यूटर आपरेटर की देखते हैं. क्योंकि जमाना कंप्यूटर का है और उनके पास तकनीकि शिक्षा है. जिससे वो परिवार चलाने लायक 20 हजार रुपये तक कमा लेते हैं.

बिहार: अपर मुख्य सचिव आमिर सुब्हानी ने कबूला, राज्य में उच्च शिक्षा की बुरी हालत
कुरैशी ने बिहार वक्फ बोर्ड से हरियाणा वक्फ बोर्ड की ही तरह इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की गुजारिश की.

पटना: बिहार के सीएम नीतीश कुमार बिहार में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पंचायत स्तर पर हाईस्कूल खोलने की वकालत कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ उन्हें की सरकार के अपर मुख्य सचिव बिहार के स्टूडेंट्स से गांव और मुफस्सिल में खुले कॉलेजों से बीए या बीएससी की डिग्री नहीं लेने की सलाह दे रहे हैं. सरकार के अपर मुख्य सचिव आमिर सुब्हानी ने खुलकर ये स्वीकार किया है कि गांव और मुफस्सिल में चलनेवाले कॉलेजों में न तो पढाई की व्यवस्था है, न ही शिक्षक हैं, न ही लाईब्रेरी है और न ही पढाई का माहौल है. ऐसे स्टूडेंट्स बी टेक की पढाई करें तो बेहतर है. अब सवाल ये उठ रहे हैं कि जब गांव या मुफस्सिल स्तर के कॉलेज डिग्री बांटने की संस्था बनी हुई है. संस्थान स्टूडेंट्स के भविष्य के साथ खिलवाड कर रहे हैं तो सरकार सबकुछ जानते हुए भी खामोश क्यों है.

रविवार को हरियाणा वक्फ बोर्ड की ओर से चलनेवाले इंजीनियरिंग कॉलेज की ओर से पटना में तकनीकि शिक्षा को लेकर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया. व्याख्यान में भाग लेने के लिए खुद हरियाणा पुलिस के आईजी लॉ एण्ड आर्डर और वक्फ बोर्ड के सीईओ डा हनीफ कुरैशी भी पहुंचे. इस मौके पर कुरैशी ने कहा कि हमारे देश में सबसे ज्यादा टेक्निकल ट्रेंड मैनपावर है. लेकिन आधुनिक तकनीक की चीजें अमेरिका में बनती है. हमारे साथ सबसे बडी समस्या ये है कि हम नकल कर आगे बढने में भरोसा करते हैं. 
 
कुरैशी ने हरियाणा बोर्ड की परीक्षा का भी उदाहरण दिया. कुरैशी ने कहा कि हरियाणा बोर्ड की परीक्षा के दौरान नकल होती है. पुलिस भगाती है और नकल करवाने वाले लोग भागते नजर आते हैं. लोग खुद कहते हैं कि मेरा बच्चा मैं चोरी कराउं या कुछ और आपको क्या परेशानी है.  कुरैशी ने कहा कि आज की तारीख में सिर्फ डिग्री से काम नहीं चलनेवाला. डिग्री के साथ स्किल की भी जरुरत है. स्कील भी मार्केट की जरुरतों के मुताबिक होनी चाहिए.

कुरैशी ने बिहार वक्फ बोर्ड से हरियाणा वक्फ बोर्ड की ही तरह इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की गुजारिश की. साथ ही ये भी कहा कि बिहार के तकनीकि शिक्षा के क्षेत्र मे हरियाणा वक्फ बोर्ड की तरह से जो भी मदद चाहिए होगी वो की जाएगी.  कार्यक्रम में पहुंचे बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव आमिर सुब्हानी ने भी तकनीकि शिक्षा को लेकर अपने विचार रखे. आमिर सुब्हानी ने कहा कि बिहार वक्फ बोर्ड अगर चाहेगा तो हरियाणा वक्त बोर्ड की तर्ज पर इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने में उसकी मदद की जाएगी. 

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार की कोशिश होगी की मेवात इंजीनीयरिंग कॉलेज और बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेजों के बीच टीचर स्टूडेंट्स के विचारों के आदान प्रदान का सिलसिला बढे. सुब्हानी ने तकनीकि शिक्षा पाने के लिए नार्थ इंडिया जाने वाले स्टूडेंट्स से गुजारिश की कि वो मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज जाकर भी अपनी पढाई पूरी कर सकते हैं. क्योंकि वहां की फीस दूसरे निजी कॉलेजों की तुलना में काफी कम है और पढाई अच्छी होती है.  

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि आज की तारीख में टेक्नीकल एजुकेशन की ही एहमियत है. सिविल सेवा की परीक्षा हो या कोई दूसरी परीक्षा ज्यादातर इंजीनियरिंग के स्टूडेंट ही सफलता पा रहे हैं. इतना ही नहीं तकनीकि शिक्षा के महत्व को बताते हुए आमिर सुब्हानी ने बिहार में चल रही उच्च शिक्षा की पढाई पर भी सवाल खडे कर दिये. सुबहानी ने कहा कि बिहार के स्टूडेंट्स के पास एजुकेशन पाने के दो विकल्प हैं. एक तो ये है कि वो अपने गांव और मुफस्सिल में चल रहे कॉलेजों से साधारण बीए बीएससी की डिग्री ले लें. जहां न तो पढाई होती है, जहां न तो लाईब्रेरी है, जहां न तो टीचर और न ही पढाई का माहौल है. या फिर बीटेक की पढाई पूरी कर कैरियर को सफल बनायें.

तकनीकि शिक्षा की एहमियत को समझाने के लिए अपर मुख्य सचिव ने तो ये भी कह दिया कि बिहार के सरकारी दफ्तरों में क्लर्क का काम कंप्यूटर आपरेटर की देखते हैं. क्योंकि जमाना कंप्यूटर का है और उनके पास तकनीकि शिक्षा है. जिससे वो परिवार चलाने लायक 20 हजार रुपये तक कमा लेते हैं.

आमिर सुब्हानी ने कहा कि सभी बच्चे तेज नहीं होते हैं. कुछ ही बच्चे आईआईटी कंपीट कर पाते हैं. हर मां बाप को ये पता होता है कि उनके बच्चे की योग्यता क्या है. ऐसे में बिना वजह बच्चों को आईआईटी की तैयारी नहीं करानी चाहिए. कमजोर बच्चे बीटेक कर भी अपना कैरियर बना सकते हैं.