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'शराबबंदी की तरह बिहार में सख्ती से लागू हो बाल श्रम कानून'

शराबबंदी कानून का उदाहरण देते हुए प्रो. पुष्पेंद्र ने कहा कि शराबबंदी कानून को जहां रातोंरात सरकार ने सख्ती से लागू किया. ऐसे में बाल श्रम और बच्चों के सुरक्षा से जुड़े कानूनों को क्यों नहीं सख्ती से लागू किया जा सकता है.

'शराबबंदी की तरह बिहार में सख्ती से लागू हो बाल श्रम कानून'
बाल श्रम पर गया में बिहार डायलॉग का आयोजन.

गया : बिहार के गया में एक्शन मीडिया के द्वारा सेंटर डायरेक्ट के सहयोग से बिहार डायलॉग का आयोजन किया गया, जिसमें बाल श्रम पर विस्तार से चर्चा हुई. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस, पटना के सेंटर हेड प्रो पुष्पेंद्र ने कहा कि हम दोहरी जिदंगी जी रहे हैं. उन्होंने कहा कि बाल श्रम को खत्म करना अब सिर्फ नैतिक नहीं बल्कि कानूनी दायित्व है. 

उन्होंने बाल श्रम के बारे में बताते हुए कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि जो बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं वो सभी बाल श्रमिक हैं, लेकिन ये पूरी हकीकत नहीं है. बाल श्रमिक दो तरह के होते हैं. एक बड़े-बड़े कल-कारखानों में काम करते हैं और दूसरे वो होते हैं जो छोटे-छोटे घरों में अगरबत्ती, मोमबत्ती इत्यादि बानाने का काम करते हैं.

उन्होंने बताया कि आमतौर पर सरकार का पूरा ध्यान बड़े-बड़े फैक्ट्री में माइग्रेट या इंडस्ट्री चाइल्ड लेबर पर ही केंद्रित है, लेकिन ये बहुत छोटा हिस्सा है. उन्होंने कहा कि बाल श्रमिक का क्षेत्र काफी व्यापक है. अगर कोई बच्चा काम पर लगाया जा रहा है तो इसका मतलब एक वयस्क की नौकरी जा रही है. हमने वयस्क में बेरोजगारी बढ़ाई और आने वाले समय में बच्चे को शिक्षित नहीं होते बस प्रशिक्षत होंगे.

कानून में बदलाव के बारे में बताते हुए बताते हुए उन्होने कहा कि कानून कहता है 14 साल के छोटे बच्चे से जोखिम का काम नहीं करना चाहिए. 14 साल से ऊपर के बच्चे जोखिम के काम कर सकते हैं. उसके लिए कई काम को जोखिम के कैटेरिया से निकाल दिया गया. कानूनी हिसाब से हम पीछे की ओर जा रहे हैं. इसके लिए एक ऐसे कानून की आश्वययकता है जिसमें लूप होल न हो.

शराबबंदी कानून का उदाहरण देते हुए प्रो. पुष्पेंद्र ने कहा कि शराबबंदी कानून को जहां रातोंरात सरकार ने सख्ती से लागू किया. ऐसे में बाल श्रम और बच्चों के सुरक्षा से जुड़े कानूनों को क्यों नहीं सख्ती से लागू किया जा सकता है.

प्रसिद्ध समाजसेवी सिस्टर मैरी एलिस ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित करना सरकार, माता-पिता और समाज सबकी जिम्मेदारी है. यह एक मिथक है कि गरीब लोग अपने बच्चों के हितों का ख्याल नहीं रखते हैं. सभी के लिए बच्चे प्यारे होते हैं.

उन्होंने कहा कि हमें सबसे पहले इसके लिए सामाजिक बदलाव करना होगा. उसके बिना इसे व्यवहार में लाना कठिन होगा. उन्होंने कहा कि बदलाव में मीडिया का भी काफी बड़ा हाथ हो सकता है. मीडिया, जनता और सामाजिक संगठन मिलकर काम करेंगे तभी इसे जड़ से खत्म कर सकते हैं. अभी मानव तस्करी बिल पास होने वाला है. उसे हमलोग कितना नैतिक समर्थन देते हैं, यह देखना होगा. कार्यक्रम का संचालन एक्शन मीडिया से व्यालोक ने किया. सेंटर डायरेक्टय के महासचिव पी के शर्मा ने सभी श्रोताओं और अतिथियों का आभार व्यक्त‍ करते हुए कहा कि यह हमारे लिए बुहत ही गौरव का दिन है. इस अवसर पर गया के समाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, सेंटर डायरेक्ट के प्रतिनिधियों के साथ-साथ गया जिला में बाल श्रम से विमुक्तक करवाए गए बच्चे और उनके माता-पिता भी मौजूद रहे.