झारखंड: लॉकडाउन को लेकर प्रशासन ने पार्षदों को जारी की नोटिस, तो मेयर बोली...

अब हिंदपीढ़ी इलाके में मौजूद पार्षदों को ही इसकी निगरानी रखनी की जिम्मेदारी देते हुए इनकी जवाबदेही सुनिश्चित की है. अगर लॉकडाउन का उल्लंघन हुआ तो पार्षदों को आगे आकर पहचान करनी होगी.

झारखंड: लॉकडाउन को लेकर प्रशासन ने पार्षदों को जारी की नोटिस, तो मेयर बोली...
झारखंड: लॉकडाउन को लेकर प्रशासन ने पार्षदों को जारी की नोटिस, तो मेयर बोली...

रांची: हिंदपीढ़ी इलाके में लॉकडाउन का पालन कराने को लेकर जिला प्रशासन हर मुमकिन कवायद में जुटा है. हिंदपीढ़ी इलाके में रोज नई प्रशासनिक रणनीति भी बनाई जा रही है. ताकि लॉकडाउन का सख्ती से पालन हो सके. इलाके में लॉकडाउन का बकायदा पालन हो इसके लिए प्रशासन ने जिम्मेदारी सुनिश्चित कर दी है.

इसके तहत, अब हिंदपीढ़ी इलाके में मौजूद पार्षदों को ही इसकी निगरानी रखनी की जिम्मेदारी देते हुए इनकी जवाबदेही सुनिश्चित की है. अगर लॉकडाउन का उल्लंघन हुआ तो पार्षदों को आगे आकर पहचान करनी होगी. वरना उन पर ही शिकंजा कसेगा. इसी के तहत इलाके के पार्षदों को नोटिस भी भेजा जा चुका है.

दरअसल, हिंदपीढ़ी में लॉकडाउन (Lockdown) का पालन करने को लेकर ब्लू प्रिंट (Blue Print) अब तैयार हो चुका है. हिंदपीढ़ी में 7 ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जा रही है. ड्रोन ऑपरेटर पीसीआर (PCR) वैन में बैठ अपने पूरे इलाके की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. ताकि इलाके में लॉकडाउन का बेहतर तरीके से पालन हो सके.
 
वहीं, लॉकडाउन का बेहतर तरीके से पालन कराने के लिए इलाके के दो पार्षदों को पंचायती राज अधिनियम का हवाला देते हुए, उनकी जिम्मेदारी और जवाबदेही सुनिश्चित की गई है. जानकारी के अनुसार, पंचायती राज अधिनियम के तहत कंटेनमेंट जोन में आने वाले वार्ड 23 और वार्ड 22 के पार्षदों को नोटिस भी जारी किया गया है.

इधर, जैसे ही पंचायती राज अधिनियम 2001 (Panchayati Raj Act 2001) की धारा 2 के विभिन्न खंड के तहत जिम्मेदारी बताते हुए, पार्षदों को सत्यापन सुनिश्चित करने का नोटिस जारी हई, निगम की मेयर और स्थानीय पार्षद सीधे तौर पर प्रशासन के खिलाफ मैदान में उतर गए.

स्थानीय वार्ड पार्षद साजदा खातून ने नोटिस के मामले पर कहा है कि, यह न्याय संगत नहीं है. क्योंकि लॉकडाउन का पालन कराना पुलिस-प्रशासन का काम है. वहीं, मामले पर निगम की मेयर भी अपने पार्षद के सपोर्ट में उतर आईं हैं. मेयर आशा लकड़ा का कहना है कि, पंचायती राज के जिन धाराओं के तहत पार्षद को नोटिस दिया गया है वह, पंचायती राज अधिनियम यहां लागू ही नहीं होता, क्योंकि नगर निगम ग्रामीण क्षेत्र नहीं है.