बिहार: पटना में वायु प्रदूषण का स्तर बेहद खराब, AQI के आंकड़ों ने बढ़ाई डॉक्टरों चिंता

पटना में वायु प्रदूषण का ग्राफ लगातार बना हुआ है. दीपावली के बाद से पटना का एक्यूआई 400 के आसपास रह रहा है. यह वायु प्रदूषण के मामले में बेहद ही खतरनाक स्तर है.

बिहार: पटना में वायु प्रदूषण का स्तर बेहद खराब, AQI के आंकड़ों ने बढ़ाई डॉक्टरों चिंता
बिहार की राजधानी पटना में लोग वायु प्रदूषण से परेशान हैं. (तस्वीर- ANI)

पटना: बिहार की राजधानी पटना में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार खराब होता जा रहा है. हाल के दिनों में पटना का एक्यूआई 400 के आसपास रह रहा है. इसके कारण लोगों और डॉक्टरों की चिंता बढ़ती जा रही है. गुरुवार को भी पटना का एक्यूआई 397 रहा. वहीं, केन्द्र सरकार की ओर से बिहार पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को अब नियम नहीं मानने वाले इन्डस्ट्रीज पर आर्थिक जुर्माना लगाने का भी अधिकार मिल गया है. इसके बाद यह उम्मीद की जा रही है कि पटना समेत बिहार के दूसरे शहरों का एक्यूआई में सुधार होगा.

पटना में वायु प्रदूषण का ग्राफ लगातार बना हुआ है. दीपावली के बाद से पटना का एक्यूआई 400 के आसपास रह रहा है. यह वायु प्रदूषण के मामले में बेहद ही खतरनाक स्तर है.

गुरुवार को पटना के एक्यूआई 397 रहा वहीं, पीएम-2 164 दर्ज किया गया. यह मानक से लगभग तीन गुणा ज्यादा है. सीओ 1.74 रहा जो मैक्सिमम लिमिटेशन के बेहद करीब था. जबकि एनओ-2 64.8 रहा जो मैक्सिमम लिमिटेशन से केवल 16 प्वाईंट कम था. पटना की ही तरह मुजफ्फरपुर शहर की आबोहवा बेहद खराब हो चुकी है. मुजफ्फरपुर का एक्यूआई गुरुवार को 326 रहा.

पटना के डॉक्टर पॉल्यूशन के ग्राफ को लेकर बेहद चिंतित हैं. डॉक्टर दीवाकर तेजस्वी की मानें तो एयर पॉल्यूशन के कारण बीमारियों में काफी वृद्धि हुई है. खासतौर पर बच्चे इससे प्रभावित हो रहे हैं. एयर पॉल्यूशन के कारण अस्थमा, एलर्जी, ब्रोंकाईटिस जैसी बीमारियों में इजाफा हुआ है. आंख और नाक से पानी आना सांस लेने तकलीफ हो रही है. इन सबके अलावा ताजा सर्वे में ये बात पता चला है कि वायु प्रदूषण के कारण कार्डियक अरेस्ट की भी समस्या आ रही है.

इधर, बिहार पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की तरफ से लगातार गुहार के बाद केन्द्र सरकार बोर्ड को फाइन लगाने अधिकार दे दिया है. यानी बोर्ड चाहे तो नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर अब सीधे फाइन कर सकता है. इसके दायरे में निजी और सरकारी दोनों तरह के संस्थान आएंगे. बीते दिनों चंपारण के दो चीनी मिलों पर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की तरफ से नियमों की अनदेखी के कारण 2 करोड़ रुपये फाइन भी लगाए गए हैं.

पटना की बात करें तो यहां धूलकण के कारण ही समस्या बेहद खराब हो गई है. साथ ही 15 साल पुरानी ऑटो और बसों से निकलने वाले धुएं ने भी यहां के वातावरण को प्रदूषित कर दिया है. हलांकि सरकार ने 15 साल पुराने सभी वाहनों को बंद करने का फैसला लिया है और इसके लिए जो ऑटो चालक अपने वाहन को सीएनजी में कन्वर्ट कराना चाहते हैं, उन्हें वित्तीय अनुदान देने की घोषणा की है.

हलांकि डीजल से चलनेवाले ऑटो पर पूरी तरह पाबंदी के लिए सरकार ने 2021 तक का वक्त दिया है. इसके बावजूद पटना के प्रदूषण को रोक पाना सरकार के लिए फिलहाल बड़ी चुनौती बनी हुई है. पटना में रहने वाले लोग भी कहते हैं कि पटना की आबोहवा इतनी खराब हो गयी है कि रास्ते पर चलना उनके लिए अब मुश्किल हो रहा है.