कोरोना काल के बीच चुनाव कराने को लेकर तेज सियासी हलचल, एक राग में निकले सभी के सुर

आरजेडी नेता कहा कि हालांकि बिहार के जनता में आक्रोश है और हमारे लिए यह पॉजिटिव प्वाइंट है लेकिन बावजूद इसके हम लोगों की जान की परवाह कर रहे हैं.

कोरोना काल के बीच चुनाव कराने को लेकर तेज सियासी हलचल, एक राग में निकले सभी के सुर
कोरोना संक्रमण के बीच चुनाव कराने को लेकर तेज हलचल, एक राग में निकले सभी के सुर.

पटना: बिहार में आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में कोरोना से संक्रमित लोगों के लिए हमारी चिंता है. हालांकि सरकार को इसके बारे में ज्यादा सोचना चाहिए. सरकार को सत्ता की चिंता ज्यादा सता रही है. इस संकट की घड़ी में हर किसी के जान की परवाह करना सबसे पहले दायित्व बनता है. 

आरजेडी नेता कहा कि हालांकि बिहार के जनता में आक्रोश है और हमारे लिए यह पॉजिटिव प्वाइंट है लेकिन बावजूद इसके हम लोगों की जान की परवाह कर रहे हैं. चुनाव की परवाह नहीं कर रहे हैं. ठीक इसी तरीके से नीतीश कुमार को भी सोचना चाहिए कि पहले जान है तो जहान है यह बात खुद प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा था.

इस पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के लोग कोई सुपर पावर नहीं हैं, वह भी इंसान है. जहां देश के कई लोगों को यह संक्रमण हो रहा है तो वह भी इससे अछूते नहीं रह सकते हैं. ऐसा बिल्कुल नहीं है कि कांग्रेस के लोग कम कमजोर हैं और भारतीय जनता पार्टी के लोग ज्यादा ताकतवर होंगे, यह बीमारी है और सबको हो सकती है. 

हालांकि नीतीश कुमार को पहले यह सोचना चाहिए कि लोगों की जान बची. उसके बाद चुनाव कराया जाए. चुनाव आयोग का यह फैसला होगा कि चुनाव सही समय पर हो या पोस्टपोन हो इसमें किसी भी राजनीतिक दल का कोई इंवॉल्वमेंट नहीं होता है, लेकिन नीतीश कुमार को सभी लोगों की सुरक्षा का चिंता जरूर करना चाहिए.

बीजेपी के एमएलसी सच्चिदानंद राय ने कहा कि चुनाव आयोग को अब यह फैसला लेना चाहिए कि चुनाव को तय समय पर ना करा कर आगे बढ़ाया जाए. चूंकि, रैली के लिए नेताओं को लोगों के बीच में जाना ही पड़ेगा और ऐसे में बहुत ज्यादा संभावना है, इस बीमारी के फैलने की.

यह फैसला अब चुनाव आयोग पर निर्भर करता है कि चुनाव के समय पर होगा. नेताओं और मंत्रियों के साथ-साथ लोगों का है तो इसी में है कि चुनाव को आगे बढ़ाया जाए.