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जातीय व्यवस्था को शांतिपूर्ण चुनौती देने के आजाद के अधिकार का सम्मान किया जाए: एमनेस्टी

एमनेस्टी इंडिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को अब सुनिश्चित करना चाहिए कि आजाद को दलितों को सशक्त बनाने के उनके कार्य को लेकर निशाना नहीं बनाया जाए

जातीय व्यवस्था को शांतिपूर्ण चुनौती देने के आजाद के अधिकार का सम्मान किया जाए: एमनेस्टी

नई दिल्ली: एमनेस्टी इंटरनेशल इंडिया ने शुक्रवार को कहा कि वर्तमान जातीय व्यवस्था को शांतिपूर्ण चुनौती देने के भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए और उनकी रिहाई ‘दलित महिलाओं और पुरुषों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने’ की दिशा में पहला कदम है.

पिछले साल आजाद को पांच मई की जातीय हिंसा के सिलसिले में जून में हिमाचल प्रदेश के डलहौजी से गिरफ्तार किया गया था. सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में हुई इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गयी थी जबकि 16 अन्य घायल हो गए थे.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दो नवंबर, 2017 को आजाद को जमानत दी थी. लेकिन पुलिस ने रिहाई के कुछ दिन पहले उनपर कठोर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत मामला दर्ज किया था. एनएसए के तहत उन्हें एक नवंबर तक हिरासत में रखना था.

एमनेस्टी इंडिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को अब सुनिश्चित करना चाहिए कि आजाद को दलितों को सशक्त बनाने के उनके कार्य को लेकर निशाना नहीं बनाया जाए और निष्पक्ष सुनवाई के बगैर उन्हें फिर हिरासत में नहीं लिया जाए.

उसने एक बयान में कहा, ‘आजाद की रिहाई दलित महिलाओं और पुरुषों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाया गया पहला कदम है . ये लोग जातीय हिंसा और भेदभाव को चुनौती दे रहे हैं.’

(इनपुट - भाषा)