पटना प्रदूषण: PM 2.5 का स्तर बहुत खराब, 345 पर पहुंचा एयर क्वालिटी इंडेक्स

पटना के डॉक्टर पॉल्यूशन के ग्राफ को लेकर बेहद चिंतित हैं. डॉक्टर दीवाकर तेजस्वी की मानें तो एयर पॉल्यूशन के कारण बीमारियों में काफी वृद्धि हुई है. खासतौर पर बच्चे इससे प्रभावित हो रहे हैं. 

पटना प्रदूषण: PM 2.5 का स्तर बहुत खराब, 345 पर पहुंचा एयर क्वालिटी इंडेक्स
पटना में प्रदूषण का स्तर बेहद खराब. (फाइल फोटो)

पटना: बिहार की राजधानी पटना में वायु प्रदूषण (Patna Air Pollution) का ग्राफ लगातार बना हुआ है. दीपावली के बाद से पटना का एक्यूआई (AQI) 400 के आसपास रह रहा है, जो कि काफी खराब माना जाता है. शुक्रवार को इसका स्तर 345 पर पहुंच गया है. वहीं, पीएम 2.5 का स्तर भी बेहद खराब है. इसका सीधा असर बच्चों और उम्रदराज लोगों पर देखा जा रहा है.

गुरुवार की बात करें तो पटना के एक्यूआई 397 रहा वहीं, पीएम-2 164 दर्ज किया गया. यह मानक से लगभग तीन गुणा ज्यादा है. सीओ 1.74 रहा जो मैक्सिमम लिमिटेशन के बेहद करीब था. जबकि एनओ-2 64.8 रहा जो मैक्सिमम लिमिटेशन से केवल 16 प्वाईंट कम था. पटना की ही तरह मुजफ्फरपुर शहर की आबोहवा बेहद खराब हो चुकी है. मुजफ्फरपुर का एक्यूआई गुरुवार को 326 रहा.

पटना के डॉक्टर पॉल्यूशन के ग्राफ को लेकर बेहद चिंतित हैं. डॉक्टर दीवाकर तेजस्वी की मानें तो एयर पॉल्यूशन के कारण बीमारियों में काफी वृद्धि हुई है. खासतौर पर बच्चे इससे प्रभावित हो रहे हैं. एयर पॉल्यूशन के कारण अस्थमा, एलर्जी, ब्रोंकाईटिस जैसी बीमारियों में इजाफा हुआ है. आंख और नाक से पानी आना सांस लेने तकलीफ हो रही है. इन सबके अलावा ताजा सर्वे में ये बात पता चला है कि वायु प्रदूषण के कारण कार्डियक अरेस्ट की भी समस्या आ रही है.

इधर, बिहार पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की तरफ से लगातार गुहार के बाद केन्द्र सरकार बोर्ड को फाइन लगाने अधिकार दे दिया है. यानी बोर्ड चाहे तो नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर अब सीधे फाइन कर सकता है. इसके दायरे में निजी और सरकारी दोनों तरह के संस्थान आएंगे. बीते दिनों चंपारण के दो चीनी मिलों पर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की तरफ से नियमों की अनदेखी के कारण 2 करोड़ रुपये फाइन भी लगाए गए हैं.

पटना की बात करें तो यहां धूलकण के कारण ही समस्या बेहद खराब हो गई है. साथ ही 15 साल पुरानी ऑटो और बसों से निकलने वाले धुएं ने भी यहां के वातावरण को प्रदूषित कर दिया है. हलांकि सरकार ने 15 साल पुराने सभी वाहनों को बंद करने का फैसला लिया है और इसके लिए जो ऑटो चालक अपने वाहन को सीएनजी में कन्वर्ट कराना चाहते हैं, उन्हें वित्तीय अनुदान देने की घोषणा की है.