Jharkhand: पुरातत्व विभाग को मिली एक हजार साल पुरानी मूर्तियां, बताएंगी हजारीबाग का इतिहास

Hazaribagh Samachar: ये मूर्तियां पाल वंश के समय की बताई जा रही है. खुदाई में मिट्टी हटाने के बाद छह मूर्ति स्पष्ट रूप से दिखने लगी हैं, सभी मूर्तियां एक ही कतार में पाई गई है. इसमें मां तारा और बुद्ध की मूर्ति लगभग ढाई फीट ऊंची है और अन्य चार मूर्तियां भी बुद्ध की हैं

Jharkhand: पुरातत्व विभाग को मिली एक हजार साल पुरानी मूर्तियां, बताएंगी हजारीबाग का इतिहास
पुरातत्व विभाग को मिली एक हजार साल पुरानी मूर्तियां.

Hazaribagh: हजारीबाग सिर्फ अपनी प्रकृति सुंदरता के लिए नहीं बल्कि अब ऐतिहासिक क्षेत्र के रूप में भी जाना जाएगा. हजारीबाग (Hazaribagh) के सदर प्रखंड के बोहनपुर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) पटना की टीम खुदाई कर रही है. इस दौरान बुद्ध और मां तारा की 6 प्रतिमा मिली है. प्रतिमा व्हाइट फाइन सैंड स्टोन की बनी बताई जा रही है. वर्तमान समय में जो पता चला है कि यह 9वीं से 11वीं शताब्दी के बीच की है. यह प्रतिमाएं लगभग हजार साल से भी अधिक पुरानी हैं.

ये मूर्तियां पाल वंश के समय की बताई जा रही है. खुदाई में मिट्टी हटाने के बाद छह मूर्ति स्पष्ट रूप से दिखने लगी हैं, सभी मूर्तियां एक ही कतार में पाई गई है. इसमें मां तारा और बुद्ध की मूर्ति लगभग ढाई फीट ऊंची है और अन्य चार मूर्तियां भी बुद्ध की हैं, जो मूर्ति अभी भी मिट्टी में दबी पड़ी है. इसका सिर्फ ऊपरी हिस्सा मिल पाया है. खुदाई कर मूर्ति निकालने के लिए प्रक्रिया चल रही है. सारे के सारे मूर्ति व्हाइट फाइन सैंड स्टोन (White Sand Stone) से बनी है. इटखोरी में ऐसी पत्थर की बनी मूर्तियां खुदाई में निकली थी, जिन्हें म्यूजियम में रखा गया है.

पुरातत्व विभाग के उत्खनन की बात आग की तरह फैल गई है. ऐसे में अब रांची विश्वविद्यालय (Ranchi University) के छात्र भी यहां साइट देखने के लिए पहुंच रहे हैं ताकि उन्हें जानकारी हो कैसे मूर्तियां निकाला जाता है और कैसे उसका अध्ययन किया जाता है. ऐसे में छात्रो का भी कहना है कि यह साइट बहुत ही महत्वपूर्ण है. यहां विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न तरह के मूर्तियां मिल रही है, जो हमारी राष्ट्रीय एकता को भी दर्शाता है.

ये भी पढ़ें-Jharkhand में 27 खिलाड़ियों को मिला नियुक्ति पत्र, CM हेमंत बोले, 'यहां रग-रग में बसा है खेल

वहीं, पीएचडी (Phd) करने वाले छात्र कहते हैं कि अगर गौर किया जाए तो यहां चार अलग-अलग मुद्राएं मूर्ति के चारों और आपको दिखेंगी. गौतम बुद्ध की चार मुद्राएं के बारे में लोग अध्ययन करते आए हैं. चारों का अलग-अलग अर्थ है. ऐसे में यह चित्र बेहद ही महत्वपूर्ण है. हम लोग अब तक जहां तक पढ़ाई करते आए हैं ऐसा पता चलता है कि हजारीबाग में जो मूर्तियां मिली है वह अन्य क्षेत्र से अलग है. इसी तरह की मूर्तियां बोधग्या में मिली हैं.

वहीं, गुरहेत पंचायत के मुखिया का कहना है कि अभी तक यहां पर विभिन्न प्रकार की मूर्तियां निकाली गई हैं, जिसमें छोटी एवं बड़ी मूर्तियां हैं. इसमें बुद्ध भगवान की भी मूर्तियां हैं. आपको बता दें कि गुरहेत पंचायत के अंतर्गत ही बहोरनपुर स्थल आता है. यहां खुदाई को देखने लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं. इसी बीच, हजारीबाग के उप विकास आयुक्त अभय कुमार भी स्थल पर पहुंचे और स्थल का मुआयना किया. उन्होंने बताया कि यह पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है. मुझे जिज्ञासा हुई कि हजारीबाग में इस तरह की खुदाई हो रही है तो कैसे हो रही होगी, इसे देखने मैं यहां पर पहुंचा हूं. 

ऐसे में स्पष्ट हो जाता है कि हजारीबाग के इस क्षेत्र का संबंध बोधगया से भी रहा होगा. जो मूर्तियां मिली हैं उसके रख-रखाव से पता चलता है कि यह पूजा स्थल हो सकता है. साथ ही, हजारीबाग के कई क्षेत्र में अभी भी खुदाई होना बाकी है. आने वाले समय में कई और पुरातात्विक धरोहर यहां से मिल सकते हैं. ऐसे में वैश्विक स्तर पर भी हजारीबाग की पहचान हो सकती है.

(इनपुट-यादवेंद्र सिंह)