उपचुनाव: समस्तीपुर सीट पर टिकट को लेकर कांग्रेस में सिर फुटौव्वल, अशोक राम का विरोध

उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस की ओर से एकबार फिर अशोक राम को ही उम्मीदवार बनाया जाएगा. अशोक राम इसी क्षेत्र से विधायक भी हैं. 

उपचुनाव: समस्तीपुर सीट पर टिकट को लेकर कांग्रेस में सिर फुटौव्वल, अशोक राम का विरोध
कांग्रेस अशोक राम को फिर से बना सकती है उम्मीदवार. (फाइल फोटो)

समस्तीपुर : बिहार के समस्तीपुर (Samastipur) लोकसभा सीट पर 21 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं. कांग्रेस से डॉ. अशोक राम (Ashok Ram) इस सीट से लगातार चुनाव लड़ते आए हैं. इसबार भी उम्मीद है कि पार्टी उन्हीं को अपना कैंडिडेट बनाएगी. लेकिन पार्टी आलाकमान के संभावित फैसले के खिलाफ अभी से विरोध के सुर बुलंद होने लगे हैं. पार्टी के ही नेता अशोक राम की जगह दूसरे को उम्मीदवार बनाने की मांग कर रहे हैं.

विधानसभा उपचुनाव (By Elections) में महागठबंधन में ज्यादा सीटों की मांग को लेकर सियासी जंग लड़ रही कांग्रेस के लिए नई मुसीबत आ खड़ी हुई है. पार्टी को अब एक लोकसभा सीट के लिए समस्तीपुर में होने वाले उपचुनाव को लेकर अलग तरह की मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल, एलजेपी सांसद रामचन्द्र पासवान (Ramchandra Paswan) के निधन के बाद समस्तीपुर लोकसभा की सीट खाली हुई है. 2019 लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की तरफ से डॉ. अशोक राम, रामचन्द्र पासवान के विरोध में मैदान में थे, लेकिन वह चुनाव हार गये.

अब नए सिरे से इस सीट पर उपचुनाव होने हैं. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस की ओर से एकबार फिर अशोक राम को ही उम्मीदवार बनाया जाएगा. अशोक राम इसी क्षेत्र से विधायक भी हैं. वर्तामान में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं. बीते चार बार से इसी सीट से लोकसभा चुनाव भी लड़ते रहे हैं, लेकिन इसबार अशोक राम का विरोध उन्हीं के पार्टी के नेताओं ने कर दिया है.

पूर्व यूथ कांग्रेस अध्यक्ष नागेन्द्र पासवान विकल ने अशोक राम की उम्मीदवारी का विरोध कर दिया है. विकल कहते हैं कि जिस नेता को चार बार वहां की जनता ने नकार दिया है, उसे फिर से कैंडिडेट बनाना सही फैसला नहीं है. जो यह फैसला लेंगे, उन्हें भी सोचना होगा. पार्टी को अगर इस सीट पर जीत हासिल करना है तो कैंडिडेट बदलना ही होगा. वैसे विकल खुद को भी इस सीट से टिकट का दावेदार मानते हैं.

वहीं, अशोक राम फिलहाल खुद को समस्तीपुर सीट का कैंडिडेट नहीं बता रहे हैं. उनका कहना है कि पार्टी आलाकमान कैंडिडेट तय करते हैं. पिछली बार भी सीट का समीकरण महागठबंधन के पक्ष में ही था, लेकिन अचानक माहौल बदल गया. कुछ साजिश भी हुई, जिसकी चर्चा वह नहीं करना चाहते हैं. इसबार नतीजे बेहतर होंगे.

चुनाव का परिणाम बेहतर तब होगा जब कांग्रेस पार्टी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ेगी, लेकिन यहां सहयोगी दलों की बात तो छोड़ दीजीए, खुद पार्टी के नेता ही संभावित कैंडिडेट के विरोध पर उतारू हैं.