बच्चों के कुपोषण को दूर करने के लिए गर्भवती माताओं को करना होगा सुपोषित: अश्विनी चौबे

पोषण अभियान के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत 8 मार्च को की गई थी. यह कोई कार्यक्रम नहीं बल्कि जन आंदोलन है. इसका लक्ष्य नाटापण, कुपोषण और कम वजन के जन्म वाले बच्चों की के आंकड़ों में दो प्रतिशत प्रतिवर्ष के हिसाब से कम करना और एनीमिया में तीन प्रतिशत की कमी करना है. 

बच्चों के कुपोषण को दूर करने के लिए गर्भवती माताओं को करना होगा सुपोषित: अश्विनी चौबे
अश्विनी चैबे ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन.

पटना: गर्भवती माताओं को सही पोषण मिले, सही आहार मिले तो कम बच्चे कुपोषित पैदा होंगे. गर्भवती माताएं खून की कमी से भी जूझती हैं, जिसके कारण भी कम वजन के बच्चों का जन्म होता है. हित के अनुसार से भोजन करें, कम खाओ और ऋतु के हिसाब से खाओ ऐसा वर्णन हमारे शास्त्रों में भी है. भारत में जो खाद्य विविधता है वो दूसरे देशों में नहीं है फिर भी हमारे बच्चे कुपोषित है यह चिंता का विषय हैं. बच्चे जब कुपोषित होंगे तो बीमारियों के शिकार हो जाते हैं. उक्त बातें भारत सरकार में स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कही.

इंडियन डायटेटिक एसोसिएशन, बिहार चैप्टर के द्वारा आयोजित न्यूट्री उत्सव 2019 के उद्घाटन के दौरान अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि हर कोई जानता है कि अच्छा भोजन क्या है. पौष्टिक क्या है. लेकिन माताएं हमें बताती हैं कि क्या खाना चाहिए और कब खाना चाहिए. एक तरीके से डायटीशियन की भूमिका बहुत हद तक मां की भूमिका के समान है. वे हमें वजन, स्वास्थ्य और चिकित्सा इतिहास के आधार पर एक उचित आहार योजना के बारे में बताते हैं. उन्होंने कहा कि सभी जिला अस्पतालों और निजी अस्पतालों में भी डायटीशियन होने चाहिए.
 
पोषण अभियान के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत 8 मार्च को की गई थी. यह कोई कार्यक्रम नहीं बल्कि जन आंदोलन है. इसका लक्ष्य नाटापण, कुपोषण और कम वजन के जन्म वाले बच्चों की के आंकड़ों में दो प्रतिशत प्रतिवर्ष के हिसाब से कम करना और एनीमिया में तीन प्रतिशत की कमी करना है. इसमें कम्युनिटी बेस्ड इवेंट को भी प्रमोट किया जाता है. इसके तहत पांच लाख से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किये जा चुके हैं. अभी उपराष्ट्रपति ने पोषण एंथम को लांच किया है. लोकसभा के अध्यक्ष ने सभी सांसदों को अपने-अपने क्षेत्र में पोषण अभियान के बारे में लोगों को जागरूक करने को कहा है.

कुपोषण में स्वछता की भूमिका के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के बाद लोग जागरूक हो रहे हैं. इसके माध्यम से बच्चों को कई बीमारियों से बचाया जा रहा है. कार्यक्रम का उद्घाटन अश्विनी कुमार चौबे, राज्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निदेशक, समेकित बाल विकास सेवाएं निदेशालय, समाज कल्याण विभाग, आलोक कुमार, नोडल पदाधिकारी, पोषण अभियान बिहार श्वेता सहाय, पोषण विशेषज्ञ, यूनिसेफ, रवि पाढ़ी, डॉ इश्पिता चक्रबर्ती, चीफ डायटीशियन, सीएमआरआई, कलकत्ता, डॉ सत्यजीत कुमार सिंह, रुबन मेमोरियल अस्पताल, डॉ. एके जायसवाल, प्रोफेसर, पीएमसीएच, ऋचा जायसवाल, संयोजक, इंडियन डायटेटिक एसोसिएशन, बिहार चैप्टर डॉ. ममता कुमारी, डॉ. मनोज कुमार, पल्लवी सुप्रिया, जोसफिन पीटर, रुबीना परवीन, हीना, सुषमा सुमन और नाहिदा, डायटीशियन की उपस्थिति दीप जला कर किया गया.

यूनिसेफ के पोषण विशेषज्ञ, रवि पाढ़ी ने कहा की नाटापन, दुबलापन, और अल्प वजन के साथ ही बदले खानपान, प्रदूषण और खेती में ज्यादा खादों के प्रयोग से कुपोषण से सम्बंधित दूसरी समस्याएं जैसे सुक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, विटामिन बी12 की कमी जैसी दूसरी समस्याएं हो रही हैं. सीएमआरआई, कलकत्ता की मुख्य डायटीशियन डॉ. इश्पिता चक्रवर्ती ने किडनी की समस्याओं के बारे में बात की और बताया कि कैसे करीब 40.3 प्रतिशत किडनी की समस्या की वजह डायबिटीज है. इसकी वजह मुख्यतः मोटापा और डायबिटीज है जो एक डायटीशियन की भूमिका को महत्वपूर्ण बना देता है.

एम्स दिल्ली की डाइटीशियन ऋचा जायसवाल ने कहा कि मेटाबोलिक सिंड्रोम कई बीमारियों का समूह है. इससे बचने के लिए शराब और तम्बाकू से दूरी और वजन को नियंत्रित रखने, उचित खानपान, स्वास्थ्य जीवन शैली एवं टीवी लैपटॉप और मोबाइल का सीमित इस्तेमाल में सबसे महत्वपूर्ण है एजुकेशन. पारस अस्पताल के मुख्य डायटीशियन डॉ. संजय मिश्र ने कहा कि कुपोषण को दूर करने में सबसे महत्वपूर्ण है एजुकेशन. वर्ल्ड बैंक के पोषण अभियान के तकनीकी विशेषज्ञ मन्तेश्वर झा ने कहा कि पोषण अभियान से सम्बंधित किसी भी प्रकार के शिकायत, और सुझाव के लिए 14408 एक टोल फ्री नंबर है.

बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के पोषण लीड आलोक रंजन  ने बच्चों के कुपोषण को दूर करने में बच्चों के जीवन के पहले 1000 दिन का महत्वा बताया जिसमे 270 दिन गर्भावस्था में और दो साल जन्म के बाद शामिल होते हैं. कार्यक्रम में दो दिनों तक चलने वाले इस न्यूट्री उत्सव 2019 में पोषण से जुड़े विभिन्न योजनाओं और संस्थओं के स्टाल भी लगे थे.