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नालंदा : JDU नेता के फांसी लगाए जाने के मामले में थानेदार, चौकीदार गिरफ्तार

फांसी की खबर मिलते ही सूबे के आलाकमान ने तुरंत आईजी और डीआईजी को मौका-ए-वारदात पर भेज दिया. तुरंत मामले की जांच करने के लिए एफएसीएल की टीम नगरनौसा थाना पहुंच गयी.

नालंदा : JDU नेता के फांसी लगाए जाने के मामले में थानेदार, चौकीदार गिरफ्तार
आईजी के आदेश पर कार्रवाई हुई है.

दीपक विश्वकर्मा/नालंदा : पुलिस कस्टडी में जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) नेता के फांसी लगाए जाने के मामले में आईजी के आदेश पर नगरनौसा के थानेदार, एएसआई और चौकीदार को गिरफ्तार कर लिया गया है. इससे नालंदा के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. इतना ही नहीं, जिन-जिन थानेदारों ने दो या तीन दिनों से अपने-अपने थाने में लोगों को पूछताछ के लिए रखा था उन्हें अपनी पुलिस जीप से उनके घर पहुंचा दिया है.

सत्ताधारी दल के नेता होने के कारण मामला गंभीर हो गया था. गणेश रविदास के परिजन अस्पताल में हंगामा कर रहे थे. उधर नगरनौसा में उग्र ग्रामीण सड़क पर आगजनी कर पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे. इतना ही नहीं उग्र ग्रामीणों ने पुलिस के ऊपर पथराव शुरू कर दिया. इसमें नूरसराय थानाध्यक्ष अभय कुमार, रहुई थानाध्यक्ष श्रीमंत कुमार सुमन, गिरियक सर्किल इंस्पेक्टर शेर सिंह यादव घायल हो गए.

फांसी की खबर मिलते ही सूबे के आलाकमान ने तुरंत आईजी और डीआईजी को मौका-ए-वारदात पर भेज दिया. तुरंत मामले की जांच करने के लिए एफएसीएल की टीम नगरनौसा थाना पहुंच गयी. मृतक के परिजनों के आरोप पर आईजी ने थानाध्यक्ष कमलेश कुमार और दरोगा बलिंद्र रॉय और चौकीदार संजय पासवान को गिरफ्तार कर लिया गया.

सूत्र बताते हैं कि जिस लड़की के अपहरण के मामले में गणेश को हिरासत में लिया गया था उस लड़की के रिश्तेदार पुलिस महकमे में उच्च पद पर आसीन हैं. यही कारण था कि इस मामले में पुलिस ने लड़के की मां को गिरफ्तार कर दो दिन पहले ही जेल भेज दिया था. जिस लड़के पर आरोप था वह गणेश का भतीजा है. जबकि एफआईआर में गणेश का नाम नहीं था. बावजूद इसके पुलिस ने अपने रसूक का इस्तेमाल कर गणेश को दो दिन तक अपने कस्टडी में रखा.

इस कांड का एक पहलू यह है कि जब गणेश का बेटा अपने पिता से मिलने थाने पहुंचा तो उसे मिलने नहीं दिया गया. जब गणेश की मौत हो गयी तब भी उसके परिजनों को शव देखने नहीं दिया गया. यह सभी प्रकरण पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करता है. जिस खिड़की से गणेश के फांसी लगाए जाने तस्वीर आयी है वह भी संदेह के घेरे में है. शव के ऊपर गर्दन के अलावे अन्य निशान भी जांच के दायरे में है. जिस प्रकार गणेश के साथ पुलिस ने करवाई की उसकी कानून इजाजत नहीं देता है.