खबर का असर : हरकत में आए अधिकारी, गंडक के कटाव को रोकने में जुटा प्रशासन

भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बाल्मीकि नगर गंडक बराज से लगातार बढ़ते जलस्तर के बाद एक लाख 55 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद कटाव की रफ्तार तेज हो गई है.

खबर का असर : हरकत में आए अधिकारी, गंडक के कटाव को रोकने में जुटा प्रशासन
गंडक के कटाव को रोकने के लिए प्रयास तेज.

बगहा : बगहा में फिर एक बार जी-मीडिया की खबर का असर हुआ है. गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि के बाद दियारा के निचले इलाकों में बाढ़ से कटाव बदस्तूर जारी है. खबर दिखाए जाने के बाद यूपी-बिहार की सीमा पर भितहा के अमवा पिपरा एपी तटबंध पर अधिकारियों की विशेष टीम पहुंची है.

बताया जा रहा है कि भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बाल्मीकि नगर गंडक बराज से लगातार बढ़ते जलस्तर के बाद एक लाख 55 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद कटाव की रफ्तार तेज हो गई है.

गंडक नदी के तट पर एपी अमवा और पिपरा पिपरासी तटबंध पर हो रहे कटाव से बचाव के लिए जल संसाधन विभाग और प्रशासन के अधिकारियों की विशेष टीम जुटी है. सीमावर्ती यूपी के कुशीनगर ज़िला से तमकुही राज एसडीएम त्रिभुवन प्रसाद के नेतृत्व में पहुंची विशेषज्ञों की टीम ने कटाव स्थलों का जायजा लेकर गंडक की कहर से बचाव के लिए राहत कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया है.

हाल ही में गंडक बराज वाल्मीकि नगर से लगातार सवा से डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर से कटाव की स्थिति बनी हुई है. गंडक नदी की तबाही से निजात पाने के लिए राहत कार्यों में विशेष टीम जुटी हुई है. बचाव कार्य के लिए जो कोशिश की जा रही है वह अभी पूरी तरह कारगर होती नहीं दिख रही है. बीलू की बोरियों की जगह नायलान कैरेट का भी इस्तेमाल करने की आवश्यक्ता है. हाथी जाल वाली पिचिंग कैरेट बिछा कर नदी की धार को समय रहते रोकने की कोशिश किया जाय तभी भितहा अमवा और ठकरहा के धूमनगर में गंडक की विनाशलीला को रोका जा सकेगा.