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देवघर: मिथिला पेंटिंग की तरह अब बनी बैद्यनाथ पेंटिंग, दूर-दूर से देखने आ रहे लोग

 राज्य के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी और बाबा नगरी के नाम से मशहूर देवघर के एक कलाकार ने देवघर की पेंटिंग बनाया है. जिसका नाम वैधनाथ पेंटिंग दिया गया है. इस पेंटिंग के जनक नरेंद्र पंजारा है. 

देवघर: मिथिला पेंटिंग की तरह अब बनी बैद्यनाथ पेंटिंग, दूर-दूर से देखने आ रहे लोग
इस पेंटिंग के जनक नरेंद्र पंजारा हैं.

देवघर: पूरे विश्व में एक अलग पहचान बना चुके मिथिला पेंटिग की तरह ही  देवघर के एक कलाकार ने देवघर की खास पेंटिंग को बनाया है. जिसका नाम बैद्यनाथ पेंटिंग दिया गया है. इस पेंटिंग के जनक नरेंद्र पंजारा है. 

सावन के महीने में इस पेंटिंग की खूब तारीफ हुई और जिला प्रशासन ने भी इसे इस पेंटिंग का नाम बाबा बैधनाथ के नाम रखने की घोषणा की है. इस पेंटिंग का सबसे बड़ी विशेषता है की इसके जरिए बाबा वैधनाथ की स्थापना की पूरी कहानी और द्वादश ज्योतिर्लिंग के स्थापना के बाद देवघर का संस्कृतिक परिवेश रहन- सहन यहां की परिपाटी सभी चीजों को बारीकी से दिखाया है.

यह कला इतने कम समय में इतनी प्रभावी है कि अब तक पटना निफ्ट से 50 से अधिक छात्र वैधनाथ पेंटिंग को जानने के लिए देवघर पहुंच गए. पांच दिवसीय एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें वैधनाथ पेंटिंग के बारे में इस कला के जनक नरेंद्र पंजियारा ने बारीकियों से निफ्ट के छात्र और छात्रा को समझाया साथ ही इस पेंटिंग की खासियत और यह पेंटिंग सब पेंटिंगों से अलग हैं.

देवघर पेंटिंग कम समय में काफी प्रसिद्ध हो गया है. इसकी बारीकियां जानने सिर्फ बिहार से ही नहीं बल्कि अन्य बड़े संस्थानों से भी छात्र-छात्राएं देवघर पहुंचते हैं और इस पेंटिंग की खासियत को जानते और समझते हैं.  कुल मिलाकर कम समय में वैद्यनाथ पेंटिंग में मिथिला पेंटिंग जादू पटिया और अन्य पेंटिंग की बराबरी की ओर बढ़ रही है.
Pintu Kumar Jha, News Desk