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इंश्योरेंस के पैसों के लिए 15 वर्षों तक लड़ी लड़ाई, तंग आकर दी सपरिवार आत्महत्या की धमकी

बजरंगी दिसंबर 2000 में सिमरिया पुल के पास कार की ठोकर से घायल हो गए थे. काफी इलाज के बावजूद भी उनके दोनों पैर नाकाम हो गए. बजरंगी ने 2002 में बेगूसराय न्यायालय में इंश्योरेंस की राशि के लिए क्लेम केस किया.

इंश्योरेंस के पैसों के लिए 15 वर्षों तक लड़ी लड़ाई, तंग आकर दी सपरिवार आत्महत्या की धमकी
क्लेम की राशि लेने के लिए इंश्योरेंस ऑफिस का चक्कर लगा रहे हैं बजरंगी.

बेगूसराय : सड़क हादसे में घायल एक व्यक्ति ने बीते 15 वर्षों तक इंश्योरेंस क्लेम की राशि की लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ी. कोर्ट ने भुगतान का आदेश भी दिया, लेकिन अपने हक के लिए वह एक वर्ष से इंश्योरेंस ऑफिस का चक्कर लगा रहा है. अधिकारियों के रवैये से तंग आकर हादसे के शिकार व्यक्ति ने सपरिवार आत्महत्या करने के लिए लिखित आवेदन इंश्योरेंस ऑफिस के अधिकारियों को भेज दिया है.

पैरों से लचार इंश्योरेंस ऑफिस का चक्कर लगा रहे शख्स का नाम सुधीर कुमार राय उर्फ बजरंगी है. बजरंगी कोर्ट के आदेश के बाद इंश्योरेंस ऑफिस से क्लेम की राशि लेने के लिए 11 माह से चक्कर लगा रहे हैं. 

दरअसल, बजरंगी दिसंबर 2000 में सिमरिया पुल के पास कार की ठोकर से घायल हो गए थे. काफी इलाज के बावजूद भी उनके दोनों पैर नाकाम हो गए. बजरंगी ने 2002 में बेगूसराय न्यायालय में इंश्योरेंस की राशि के लिए क्लेम केस किया. 15 साल तक कोर्ट में लड़ाई के बाद जून 2017 में कोर्ट ने पांच लाख 15 हजार रुपए भुगतान करने का आदेश दिया.

कोर्ट ने 60 दिनों के अंदर पूरी राशि भुगतान नहीं करने पर नौ प्रतिशत ब्याज की राशि के साथ भुगतान करने का आदेश दिया. राशि की उम्मीद में बजरंगी पिछले 11 महीने से नेशनल इंश्योरेंस ऑफिस का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें पैसे नहीं मिले हैं. थक-हारकर बजरंगी ने सपरिवार आत्मदाह करने की धमकी दी है. इस संबंध में उन्होंने नेशनल इंश्योरेंस सहित अन्य अधिकारियों को लिखित आवेदन भी दिया है.

बजरंगी का कहना है कि कार की ठोकर से उसके दोनों पैर डैमेज हो गए. इलाज में 80 लाख रुपए खर्च हो गए. जमीन जायदाद बिक गए. अब कोई सहारा नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद भी नेशनल इंश्योरेंस राशि का भुगतान नहीं कर रहा है. थक-हारकर आत्मदाह की करने का निर्णय लिया है.

इस संबंध में नेशनल इंश्योरेंस के मैनेजर ने कहा कि चार मीहने से वह यहां पर हैं, लेकिन एक बार भी पीड़ित परिवार मिलने नहीं आया. उन्हें अब यह जानकारी मिली है. उन्होंने वरीय अधिकारी को इस संबंध में जानकारी दी है. जल्द ही कोई निर्णय लिया जाएगा. मैनेजर ने हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है.