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पंकज त्रिपाठी के गांव में 'बेलसंड महोत्सव' का आयोजन, रात भर चला सांस्कृतिक कार्यक्रम

बॉलीबुड कलाकार पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) के पैतृक गांव बरौली प्रखंड के बेलसंड में बेलसंड महोत्सव का आयोजन किया गया. हालांकि इस महोत्सव में पंकज त्रिपाठी शूटिंग में व्यस्त होने के कारण नहीं शामिल हो पाए. इस कारण से इस महोत्सव को सिर्फ एक दिन का कर दिया गया है. बेलसंड महोत्सव में देवी जागरण से लेकर अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए.

पंकज त्रिपाठी के गांव में 'बेलसंड महोत्सव' का आयोजन, रात भर चला सांस्कृतिक कार्यक्रम
पंकज त्रिपाठी के गांव में बेलसंड महोत्सव का आयोजन.

गोपालगंज: बॉलीबुड कलाकार पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) के पैतृक गांव बरौली प्रखंड के बेलसंड में बेलसंड महोत्सव का आयोजन किया गया. हालांकि इस महोत्सव में पंकज त्रिपाठी शूटिंग में व्यस्त होने के कारण नहीं शामिल हो पाए. इस कारण से इस महोत्सव को सिर्फ एक दिन का कर दिया गया है. बेलसंड महोत्सव में देवी जागरण से लेकर अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए.

बेलसंड महोत्सव में भोजपुरी अभिनेता और गायक अजित आनंद, गायिका सह जिला पार्षद सदस्य पुष्पा सिंह, गायिका राजनंदनी, मंजेश वर्मा सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी. रात भर चले इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक मनमोहक और आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए. मनमोहक झांकी ने सभी का दिल जीत लिया.

महोत्सव के संयोजक मदेश तिवारी ने बताया कि छठ के बाद गांव में 30 बर्षों से ड्रामा होता था. बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी बचपन से ही यहां अपना ड्रामा प्रस्तुत करते थे. वर्षों तक वे इसी मंच से लोगों का मनोरंजन करते थे. बाद में वे ड्रामा स्कूल में भाग लेने के लिए चले गए. इसके बाद वे बॉलीवुड के स्थापित अभिनेता हो गए. 

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पंकज त्रिपाठी के भतीजे मदेश तिवारी ने भी बताया कि इसी मंच से अभिनेता पंकज त्रिपाठी निकले. साथ ही उन्होंने कहा कि दिन प्रतिदिन इस महोत्सव का स्वरूप बदलता गया. इस गांव के मंच का स्वरूप ऐसा बदला कि वर्ष 2011 में इसे बेलसंड महोत्सव के नाम से जाना जाने लगा.

छठ पर्व के दौरान फिल्म अभिनेता पंकज त्रिपाठी अक्सर अपने गांव आते थे. गांव के मंच पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होते थे. इस बार वे दिवाली से एक दिन पहले ही मुंबई वापस लौट गए. इस कारण से महोत्सव में वे शमिल नहीं हो सके. बहरहाल देर रात तक चले इस महोत्सव में रात भर पंचायत और आसपास के गांव के लोग शामिल हुए.