बाढ़ की विभीषिका झेल रहा बेतिया, आम जनजीवन से लेकर पशुओं तक को पड़े हैं खाने के लाले

पश्चिम चंपारण जिले की तो यहां 9 विधानसभा है जिसमें 9 ब्लॉक 26 पंचायत बाढ़ से पूरी तरह से प्रभावित है. नेपाल से छोड़ा गया पानी गंडक के साथ ही कई और नदियों के सहारे बिहार में प्रवेश कर जाता है और यही लोगों के लिए काल बन कर उभरता है.

बाढ़ की विभीषिका झेल रहा बेतिया, आम जनजीवन से लेकर पशुओं तक को पड़े हैं खाने के लाले
बाढ़ की विभीषिका झेल रहा बेतिया, आम जनजीवन से लेकर पशुओं तक को पड़े हैं खाने के लाले.

बेतिया: आजादी से पहले या आजादी के बाद उत्तर बिहार के कई जिलों में हर साल लोगों को बाढ़ की विनाशकारी लीला झेलनी पड़ती है. लोग बेघर हो जाते हैं तो सरकार की तरफ से लाख दावे किए जाते हैं लेकिन सरकार के तमाम दावे और योजनाएं फाइलों में सिमट कर रह जाते हैं. 

बात करें पश्चिम चंपारण जिले की तो यहां 9 विधानसभा है जिसमें 9 ब्लॉक 26 पंचायत बाढ़ से पूरी तरह से प्रभावित है. नेपाल से छोड़ा गया पानी गंडक के साथ ही कई और नदियों के सहारे बिहार में प्रवेश कर जाता है और यही लोगों के लिए काल बन कर उभरता है.

वही नौतन विधानसभा का एक ऐसा पंचायत है, बैजुआ, जिसके बाद यूपी की सीमा शुरू हो जाती है. बेतिया शहर के संतघाट से 15 किलो मीटर पर चंपारण बांध है, जो गंडक नदी पर बना हुआ है. यहां से इस पंचायत में जाने की यात्रा नाव से तय की जाती है. 

यहां पहुंचने में पांच घंटे लगते हैं. इतने ही समय में यानि 5 घंटे में पटना से बेतिया पहुंच सकते हैं. हालत काफी खराब थे. इस दौरान वीआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी भी वही मौजूद थे. 

प्रतिदिन लोगों के लाने और ले जाने के लिए निजी तौर पर नाव चलाया जाता है. इस इलाके में लोगों की परेशानियां बहुत बड़ी हैं. न सिर्फ आम जनजीवन प्रभावित है, बल्कि पशुओं के लिए चारे की भी बमुश्किल व्यवस्था हो पा रही है. मुकेश सहनी ने इस दौरान लोगों को खाने के सामान दिए.