मैकेनिक को ट्रेंड नहीं किया, आठ बसों की मरम्मत पर निगम ने फूंक दिए 11 लाख

विभाग ने डिपो को टाटा कंपनी की बसों के साथ आयशर मोटर्स की बसें भी दी. दोनों ही कंपनियों की बसों के मैकेनिज्म में अंतर के कारण वर्कशॉप में काम कर रहे मैकेनिक की परेशानी बढ़ गई.

मैकेनिक को ट्रेंड नहीं किया, आठ बसों की मरम्मत पर निगम ने फूंक दिए 11 लाख

भागलपुर : तिलकामांझी स्थित पथ परिवहन निगम में बड़ा गड़बड़झाला चल रहा है. वर्षों पुराने इस डिपो के वर्कशॉप में खराब पड़े बसों की मरम्मत करवाने के बजाय उन्हें पूर्णिया वर्कशॉप भेजा जा रहा है. पूर्णिया वर्कशॉप में होने वाली मरम्मत के नाम पर निगम सालाना 8448 लीटर डीजल जला रहा है. इस पर तकरीबन छह लाख रुपये सलाना खर्चा आ रहा है.

इतना ही नहीं स्पेयर पाट्‌र्स पर भी करीब पांच लाख रुपये फूंके रहे हैं. अपने वर्कशॉप में काम नहीं करवाने से निगम के राजकोष में हर साल तकरीबन 11 लाख रुपए की सेंध लगाई जा रही है.

वर्कशॉप सूत्रों के अनुसार विभाग ने डिपो को टाटा कंपनी की बसों के साथ आयशर मोटर्स की बसें भी दी. दोनों ही कंपनियों की बसों के मैकेनिज्म में अंतर के कारण वर्कशॉप में काम कर रहे मैकेनिक की परेशानी बढ़ गई. मैकेनिक आयशर मोटर्स की बसों की मैकेनिज्म नहीं समझ पाए. उन्हें समझाने के लिए विभाग ने मैकेनिक को ट्रेंड करने की जहमत नहीं उठाई. इसके लिए जरूरी उपकरणों की भी खरीदारी कर वर्कशॉप को अपग्रेड नहीं किया. अफसरों ने सीधे ही बसों को पूर्णिया भेजने का फैसला ले लिया और निगम के राजकोष में सालाना 11 लाख रुपए की सेंध लगानी शुरू कर दी.

इस मामले में निगम का कहना है कि, यहां के वर्कशॉप में मैकेनिक की कमी है इसलिए बसें पूर्णिया भेजी जा रही हैं. स्टैंडर्ड वर्कशॉप बनाने की हम कोशिश कर रहे हैं. बसें बिगड़ने लगीं तो सुधारने के लिए यहा तरीका निकाला गया है.

पथ परिवहन के तिलकामांझी डिपो से रोजाना 59 बसें चलती हैं. पूर्णिया, कटिहार, बेगूसराय, खगडिया समेत अन्य रूटों पर ये बसें रोजाना 118 फेरे लगा रही हैं. इनसे निगम को सालाना 2.40 करोड़ रुपए की कमाई हो रही है. इतनी कमाई करने के बाद भी निगम अपने पुराने वर्कशॉप को दुरुस्त नहीं कर पा रहा है. विभाग ने भागलपुर डिपो को टाटा और आयशर मोटर्स की बसें दी हैं. जब बसें बिगड़ने लगीं तो जिम्मेदारों ने इसे सुधारने का नायाब तरीका निकाल लिया.

आठ बसों के पूर्णिया आने-जाने में ही सालाना छह लाख रुपये खर्च हो रहे हैं. साथ ही स्पेयर पाट्‌र्स पर भी तकरीबन पांच लाख खर्च किे जा रहे हैं. तिलकामांझी वर्कशॉप में संसाधन की कमी नहीं है. यहां मैकेनिक के नहीं रहने के कारण बसों को ठीक करने के लिए पूर्णिया भेजा जाता है.
 
आयशर मोटर्स की बसों को ठीक करने में मैकेनिकों ने खड़े किए हाथ 
निगम से मिली जानकारी के अनुसार, आयशर मोटर्स की बसें खराब होने लगीं तो भागलपुर डिपो के मैकेनिकों ने हाथ खड़े कर दिए. इस पर जिम्मेदारों ने बसों को पूर्णिया डिपो भेजना शुरू कर दिया. उन्होंने भागलपुर में इसकी वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने की कोशिश ही नहीं की. बताते हैं कि एक बस को माह में अमूमन औसतन दो बार पूर्णिया भेजा रहा है. इसकी मरम्मत करवाई जा रही है. एक बस को दो बार पूर्णिया जाने और आने में ही 88 लीटर डीजल खपाना पड़ रहा है. ऐसे में आठ बसों को हर महीना दो बार पूर्णिया भेजने में निगम हर माह 704 लीटर डीजल फूंक रहा है. सिर्फ डीजल पर ही हर माह 49,280 रुपए की दर से एक साल में 5.91 लाख रुपए बर्बाद किए जा रहे हैं.

तिलकामांझी डिपो से प्रतिदिन 59 बसें चलती हैं. यहां से निगम को तकरीबन 2.40 करोड़ रुपये की कमाई होती है. इसके बावजूद वर्कशॉप को सुधारा नहीं जा रहा है. जानकारी के मुताबिक एक बस की मरम्मत के दौरान पूर्णिया वर्कशॉप में स्पेयर पाट्‌र्स पर हर माह करीब पांच हजार रुपए खर्च हो रहे हैं. इस तरह आठ बसों के स्पेयर पाट्‌र्स पर 40 हजार रुपए की दर से एक साल में 4.80 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं.