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बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही भागलपुर के कपड़ा बाजार में रौनक लौट आई है. भागलपुरी सिल्क और लिनन कपड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं की पहली पसंद बन गए हैं. खासकर सिल्क और लिनन के कुर्ते, गमछे, बंडी और डल चादर की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. चुनावी मौसम में इस कारोबार के 100 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.
भागलपुर का सिल्क कारोबार पिछले कुछ वर्षों से अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और आर्थिक मंदी से प्रभावित था. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा टैरिफ बढ़ाने, विभिन्न देशों में फैली हिंसा और युद्ध जैसे हालातों ने इस व्यापार पर गहरा असर डाला था. बुनकरों और कारोबारियों के लिए यह समय बेहद कठिन था. लेकिन चुनावी मौसम ने एक बार फिर इस उद्योग में नई जान फूंक दी है.
राजनीतिक दलों के नेता, कार्यकर्ता और संभावित प्रत्याशी अब चुनाव प्रचार के लिए भागलपुरी सिल्क और लिनन परिधानों को ऑर्डर करने में जुट गए हैं. सिल्क और लिनन के कपड़े पहनने में आरामदायक होने के साथ-साथ टिकाऊ और रॉयल लुक देने वाले माने जाते हैं. यही वजह है कि इनकी डिमांड में पिछले एक महीने में 60 से 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है.
चुनाव के नजदीक आते ही चंपानगर और आसपास के इलाकों में पावरलूम मशीनें लगातार चल रही हैं. हजारों बुनकर दिन-रात जुटकर मिले हुए ऑर्डर पूरे कर रहे हैं. कपड़े न सिर्फ बिहार बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों और चुनावी क्षेत्रों में भी भेजे जा रहे हैं. इस वजह से बाजारों में भीड़ बढ़ गई है और बुनकरों के चेहरों पर रौनक लौट आई है.
भागलपुरी अंगवस्त्र और डल चादर राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हो रही है. इसकी खासियत यह है कि यह हल्की, सस्ती और मुलायम होने के कारण नेताओं और कार्यकर्ताओं की पहली पसंद बन रही है. चुनाव प्रचार के दौरान इसे पहनना आसान है और यह एक अलग पहचान भी दिलाती है.
पिछले कुछ महीनों से सिल्क कारोबार लगातार मंदा चल रहा था. हालांकि, जीएसटी स्लैब में बदलाव के बाद बुनकरों और कारोबारियों को बड़ी राहत मिली. अब चुनावी ऑर्डर मिलने के बाद उनकी कमाई बढ़ने लगी है और भविष्य में भी इस कारोबार से अच्छी आमदनी होने की उम्मीद जताई जा रही है.
भागलपुर की तसर सिल्क, मूंगा सिल्क, लिनन और बाटिक प्रिंट की साड़ियां, स्कार्फ और डल चादर सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि गल्फ कंट्री और यूरोपियन देशों में भी काफी लोकप्रिय हैं. यहां से हर महीने करोड़ों रुपये के ऑर्डर आते हैं. चुनावी मौसम ने घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मांग को भी और मजबूत किया है.
भागलपुर के बुनकर और व्यापारी लंबे समय से कारोबार में आई गिरावट से परेशान थे. अब चुनावी ऑर्डर ने उनकी आय को बढ़ा दिया है. व्यापारियों का मानना है कि आने वाले महीनों में सिल्क और लिनन कपड़ों की मांग और बढ़ेगी. यह न सिर्फ उनके लिए खुशहाली लाएगा बल्कि भागलपुर की पहचान को भी और मजबूत करेगा.
इनपुट- अमित सिंह
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