बिहार: IAS बनना है इस बेटी का सपना, बोर्ड परीक्षा में टॉप कर फिर बढ़ाया बेटियों का मान

कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों. जी हां, यह कहावत आज एक बार फिर चरितार्थ हुई है. दरअसल, मंगलवार को बिहार बोर्ड के नीतीजों का ऐलान हुआ है. इसमें कला वर्ग में साक्षी ने टॉप किया है. बता दें कि साक्षी ने ग्रामीण परिवेश में रहकर पढ़ाई की और परीक्षा में टॉप कर न सिर्फ उन्होंने अपने परिवार बल्कि पूरे गांव का नाम रोशन किया है.

बिहार: IAS बनना है इस बेटी का सपना, बोर्ड परीक्षा में टॉप कर फिर बढ़ाया बेटियों का मान
साक्षी आगे जाकर अपने करियर में IAS बनना चाहती है.

बेतिया: कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों. जी हां, यह कहावत आज एक बार फिर चरितार्थ हुई है. दरअसल, मंगलवार को बिहार बोर्ड के नीतीजों का ऐलान हुआ है. इसमें कला वर्ग में साक्षी ने टॉप किया है. बता दें कि साक्षी ने ग्रामीण परिवेश में रहकर पढ़ाई की और परीक्षा में टॉप कर न सिर्फ उन्होंने अपने परिवार बल्कि पूरे गांव का नाम रोशन किया है.

वहीं, बिहार में इंटर आर्ट्स की परीक्षा में टॉपर बनी साक्षी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सच्ची लगन, जूनून और चाहत हो तो अभावों में भी सपनें पूरे किए जा सकते हैं. दरअसल, आज फिर एक बेटी ने चंपारण के साथ साथ पूरे बिहार का नाम रौशन किया है. गांव की रहने वाली इस बेटी ने राज्य में इंटर आर्ट्स की परीक्षा में टॉप किया है.

बिहार बोर्ड के इंटर आर्ट्स की परीक्षा में पश्चिम चंपारण जिले के योगापट्टी की साक्षी कुमारी स्टेट टॉपर बनी हैं. साक्षी को 474 नंबर मिले हैं. साक्षी मूल रूप से योगापट्टी प्रखंड के हथिया मच्छरगांवा गांव की रहने वाली है. उसके पिता चंद्रभूषण प्रसाद किराना व्यवसायी हैं, जबकि माता सीमा देवी गृहिणी हैं.

बता दें कि साक्षी ने मैट्रिक तक आदर्श उच्च विद्यालय मच्छरगांवां से शिक्षा ली और वो नगर के महंत राम रूप गोस्वामी कॉलेज की इंटर आर्टस की छात्रा है. साक्षी प्रतिदिन अपने गांव से 15 किलोमीटर साइकिल चलाकर बेतिया महंत राम रूप गोस्वामी कॉलेज में पढ़ने के लिए जाती थी.

वहीं, गांव में साक्षी को ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षक अवधेश प्रसाद ने कहा कि साक्षी शुरू से ही काफी मेधावी है. मैट्रिक की परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुई थी और 414 अंक लाकर प्रखंड टॉपर बनी थी. इस सफलता का श्रेय साक्षी अपने माता-पिता एवं शिक्षकों को दे रही हैं.

इधर, साक्षी की मानें तो वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना चाहती हैं और आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं. वहीं, साक्षी के माता-पिता अपनी बेटी की इस सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं.