बिहार विधानसभाः कांग्रेस का दामन छोड़ सकते हैं 15 विधायक !

बिहार विधानसभाः कांग्रेस का दामन छोड़ सकते हैं 15 विधायक !
बिहार में आरजेडी गठबंधन का साथ छोड़ जेडीयू के साथ जा सकते हैं कांग्रेस के 15 विधायक (फाइल फोटो)

नई दिल्लीः बिहार में आज नीतीश कुमार को विधानसभा में बहुमत साबित करना है. बुधवार को आरजेडी से गठबंधन तोड़ गुरुवार को बीजेपी साथ मिलकर सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार ने दावा किया है उनके पास बहुमत के आंकड़े 122 से ज्यादा 132 विधायकों के समर्थन का दावा किया है. वहीं आरजेडी का कहना है कि वो सदन में सीक्रेट वोटिंग की मांग करेगी. क्योंकि सबसे ज्यादा विधायकों वाली पार्टी आरजेडी को उम्मीद है कि जेडीयू के 11 यादव विधायक और 5 मुस्लिम विधायक नीतीश के बीजेपी के साथ जाने और लालू यादव से गठबंधन तोड़ने के बाद आरजेडी को वोट दे सकते हैं.

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लेकिन इन सबके बीच बड़ी खबर ये आ रही है कि आरजेडी को समर्थन करने वाली कांग्रेस के 27 विधायकों में से 15 विधायक जेडीयू-बीजेपी गठबंधन को समर्थन कर सकते है. वहीं जेडीयू विधायक खुर्शीद आलम का दावा है कि जेडीयू के सभी मुस्लिम विधायक नीतीश का समर्थन करेंगे. आपको बता दें कि विधानसभा में बहुमत परीक्षण का लाइव प्रसारण नहीं किया जाएगा. 

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243 सदस्यीय विधानसभा में नीतीश सरकार को बहुमत के लिए 122 सदस्यों के समर्थन की जरूरत है. नीतीश के पास 71, बीजेपी और सहयोगियों के पास 58 सीटें हैं. कुल 129 हुए. 4 निर्दलीय विधायक हैं. एनडीए का दावा है कि उनके पक्ष में 132 सदस्य हैं. वहीं सबसे बड़े दल आरजेडी के खाते में 80, कांग्रेस के पास 27 और सीपीएम के पास 3 विधायक हैं.

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बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सरकार गठन के लिए निमंत्रण नहीं दिए जाने को लेकर गुरुवार (27 जुलाई) को पटना उच्च न्यायालय में दो अलग-अलग जनहित याचिका दायर की गई है. पटना उच्च न्यायालय में सरकार बनाने को लेकर राज्यपाल के फैसले पर हैरानी जताते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक सरोज यादव और अन्य तथा नौबतपुर के समाजवादी नेता जितेंद्र कुमार की तरफ से अलग-अलग जनहित याचिका दायर की गई है.

जनहित याचिका में कहा गया है कि सबसे ज्यादा विधायकों वाली पार्टी राजद को पहले सरकार बनाने का न्योता दिया जाना चाहिए था, जबकि राज्यपाल ने नीतीश कुमार को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है. याचिका में कई मामलों का हवाला देते हुए इसका विवरण दिया गया है. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने बताया कि इस मामले में अदालत से हस्तक्षेप करने की मांग की गई है. नीतीश कुमार को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना संविधान का उल्लंघन है.