जब बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी राबड़ी देवी के समर्थन में बोले!

सुशील मोदी ने कहा है कि भले सृजन घोटाले के समय मुख्यमंत्री राबड़ी देवी थीं, लेकिन केवल इस आधार पर उनके खिलाफ कोई मामला या आरोप नहीं लगाया जा सकता. 

जब बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी राबड़ी देवी के समर्थन में बोले!
सुशील मोदी ने कहा कि वह चाहे बीजेपी का नेता हो या जनता दल यूनाइटेड या राजद का नेता. अगर घोटाले में उसके खिलाफ सबूत पाया गया तो जांच एजेंसी उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: बिहार में इस वक्त सृजन घोटाले की गूंज है और विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार पर हमलावर है, ऐसे में बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने राबड़ी देवी को लेकर कुछ ऐसा बोला है जो राबड़ी के पक्ष में नज़र आ रहा है. मीडिया सूत्रों के मुताबिक सुशील मोदी का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को वह चाहे मुख्यमंत्री हो या वित्तमंत्री केवल उस कार्यकाल में घोटाला होने से उनकी संलिप्तता साबित नहीं होती.

सुशील मोदी ने कहा है कि भले सृजन घोटाले के समय मुख्यमंत्री राबड़ी देवी थीं, लेकिन केवल इस आधार पर उनके खिलाफ कोई मामला या आरोप नहीं लगाया जा सकता. अपने खिलाफ आरोपों पर सुशील मोदी ने कहा कि राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी भी मंत्री रहे और तेजप्रताप यादव जब स्वास्थ्य मंत्री थे तब भी उनके विभाग के पैसे का गबन हुआ, लेकिन इससे इनको दोषी नहीं माना जा सकता.

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सुशील मोदी मंगलवार को बिहार विधानसभा में पत्रकारों से बात कर रहे थे. सुशील मोदी का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को वह चाहे मुख्यमंत्री हो या वित्तमंत्री केवल उस कार्यकाल में घोटाला होने से उनकी संलिप्तता साबित नहीं होती, लेकिन अगर जांच में किसी के खिलाफ साक्ष्य पाया गया तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा. 

सुशील मोदी ने कहा कि वह चाहे बीजेपी का नेता हो या जनता दल यूनाइटेड या राजद का नेता. अगर घोटाले में उसके खिलाफ सबूत पाया गया तो जांच एजेंसी उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी. 

सृजन के मुद्दे पर बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों में मंगलवार को हंगामा हुआ लालू यादव के आरोपों पर सुशील मोदी ने कहा कि कम से कम सीबीआई जांच पर सवाल नहीं करेंगे भले वह उनके खिलाफ ही क्यों ना हो.

इससे पहले बिहार सरकार ने भागलपुर जिले में एक स्वयंसेवी संस्थान 'सृजन महिला विकास सहयोग समिति' द्वारा सरकारी खाते की राशि के फर्जीवाड़े के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने का निर्णय लिया. इस मामले में अब तक 70 करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई है.

अब तक भागलपुर के विभिन्न थानों में नौ अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई गई हैं

फिलहाल इस फर्जीवाड़े की जांच आर्थिक अपराध इकाई कर रही है. इस मामले में अब तक भागलपुर के विभिन्न थानों में नौ अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई गई हैं. आर्थिक अपराध इकाई ने इस मामले में अब तक सरकारी अधिकारी, कर्मचारी, बैंक के अधिकारी और सृजन संस्था के कर्मचारी सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया है. हालांकि इस मामले के मुख्य कर्ताधर्ता सृजन की संस्थापिका मनोरमा देवी (दिवंगत) के पुत्र अमित कुमार और बहू प्रिया कुमार की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो पाई है.

उल्लेखनीय है कि भागलपुर के सबौर स्थित स्वयंसेवी संस्था सृजन महिला विकास सहयोग समिति के बैंक खाते में सरकारी योजनाओं के पैसे रखे जाते थे, जिसका उपयोग संस्था चलाने वाले अपने व्यक्तिगत कार्यो में करते थे. पुलिस का दावा है कि यह गोरखधंधा वर्ष 2009 से ही चल रहा था. गौरतलब है कि इस मामले के प्रकाश में आने के बाद विपक्ष पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रही थी.