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छठ पूजा को लेकर राजधानी पटना में सीएम नीतीश कुमार ने किया घाटों का निरीक्षण

आस्था का महापर्व छठ पूजा के लिए राजधानी पटना में गंगा के छठ घाट 10 नवंबर तक व्रतियों के लिए तैयार हो जाएंगे. गंगा घाटों पर पूजा के लिए सारी व्यवस्थाएं कर ली गई है.

छठ पूजा को लेकर राजधानी पटना में सीएम नीतीश कुमार ने किया घाटों का निरीक्षण
सीएम नीतीश कुमार पटना में छठ घाटों का निरीक्षण कर रहे हैं.

पटनाः आस्था का महापर्व छठ पूजा के लिए राजधानी पटना में गंगा के छठ घाट 10 नवंबर तक व्रतियों के लिए तैयार हो जाएंगे. गंगा घाटों पर पूजा के लिए सारी व्यवस्थाएं कर ली गई है. वहीं, जो चीजें बाकी हैं उन्हें भी तेजी से पूरा किया जा रहा है. बताया गया है कि अगले 48 घंटे में सारी व्यवस्थाएं भी पूरी हो जाएंगी. बता दें कि 13 नवंबर को छठ पूजा का संध्या अर्ध्य दिया जाएगा. ऐसे में छठ घाटों पर हजारों की संख्या में भीड़ होगी.

छठ पूजा को लेकर बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी काफी उत्साहित हैं. और व्रतियों के साथ-साथ लोगों को भी घाटों पर परेशानियां का सामना नहीं करना पड़े इसके लिए वह खुद घाटों के कामों का निरीक्षण कर रहे हैं. वह पहले भी घाटों का निरीक्षण कर चुके हैं. लेकिन गुरुवार को वह दोबारा छठ घाटों का मुआयना किया.

महापर्व छठ में काफी कम दिन ही बाकी रह गए हैं. ऐसे में गंगा के घाटों का जायजा लेने के लिए सीएम नीतीश कुमार आठ नवंबर को निकले और नारसीगंज घाट से लेकर कंगनघाट तक का जायजा लिया. दो घंटे तक स्टीमर से सीएम घाटों को देखते रहे. इस दौरान खरतनाक घाटों पर सीएम की विशेष नजर थी. साथ ही व्रतियों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसको लेकर भी सीएम गंभीर दिखे. 

बिहार सरकार छठ व्रतियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने देना चाहती है. यही वजह है कि ज्यादा से ज्यादा घाटों को निर्माण किया जा रहा है, ताकि व्रती आराम से महापर्व को मना सकें. सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि बीते सालों में जिस तरह से घटना हुई थी. उससे सबक लेकर तैयारियों को व्यापक किया गया है. 

पटना में गंगा के किनारे बने छठ घाटों पर रोशनी से लेकर सुरक्षा तक के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं. गंगा नदी में व्रतियों के कितने अंदर तक जाना है, इसका चिन्ह लगाया गया है. हर घाट पर वॉच टॉवर और चेंजिंग रूम बनाया गया है. 

वहीं, खतरनाक घाटों को लाल कपड़े और व्रत करनेवाले घाटों पर सफेल और पीला कपड़ा लगाया गया है. जिन स्थानों पर पक्की सीढ़ियां नहीं हैं, वहां अस्थायी सीढ़ियां बनायी गयी हैं. गंगा घाट तक पहुंचने के लिए रास्तों का निर्माण भी किया गया है.