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बिहार: महागठबंधन को बचाने की कवायद जारी, कांग्रेस ने कहा- 'सीट से ज्यादा विचारधारा अहम'

कांग्रेस भी अब पांच से घटकर लोकसभा की सीट के अलावा दो विधानसभा सीटों की डिमांड पर आ टिकी है. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी ने इसके संकेत भी दिये हैं. कादरी ने कहा है कि सीट से ज्यादा विचारधारा हमारे लिए अहम

बिहार: महागठबंधन को बचाने की कवायद जारी, कांग्रेस ने कहा- 'सीट से ज्यादा विचारधारा अहम'
कौकब कादरी ने कहा है कि सीट से ज्यादा विचारधारा हमारे लिए अहम है. (फाइल फोटो)

पटना: बिहार में महागठबंधन को बचाने की कवायद जारी है. गुरुवार को आरजेडी ने कांग्रेस की दो सीटों पर अपने कैंडिडेट नहीं उतारने की घोषणा कर अपना हाथ आगे बढाया है. वहीं, कांग्रेस भी अब पांच से घटकर लोकसभा की सीट के अलावा दो विधानसभा सीटों की डिमांड पर आ टिकी है. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी ने इसके संकेत भी दिये हैं. कादरी ने कहा है कि सीट से ज्यादा विचारधारा हमारे लिए अहम. हमारी दो परंपरागत सीटों के अलावा एक और सीट मिल जाए तो बातचीत संभव है. 

बिहार में महागठबंधन रहेगा या नहीं सवाल अभी भी बरकरारा हैं. हलांकि भारी खींचतान के बावजूद महागठबंधन को बचाने की कवायद जारी है. आरजेडी के बाद अब कांग्रेस ने भी महागठबंधन को बचाने को लेकर संकेत दिये हैं. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी ने कहा है कि परंपरागत दो सीटों के अलावा अगर एक और सीट पार्टी को मिल जाती है तो बातचीत संभव है. कौकब कादरी ने कहा है कि हमारे लिए सीटों से ज्यादा विचारधारा अहम है. विचारधारा के लिए हमने कई कुर्बानियां भी दी हैं. 

 

आरजेडी हमारा पुराना सहयोगी रहा है. बातचीत की गुंजाइश बरकरार है. वैसे भी ये उपचुनाव है और इस चुनाव की हार जीत से न तो हमें फर्क पड़नेवाला है और न ही विरोधियों को. वहीं मांझी और मुकेश सहनी की ओर से कैंडिडेट दिये जाने के सवाल पर कादरी ने कहा है कि लोकसभा चुनाव के बाद संवादहीनता के कारण ऐसी स्थिती आयी है. सहयोगी दलों के साथ संवाद जरुरी था. हमें लगता है कि अभी भी बातचीत कर मामला सुलझाया जा सकता है.

इधर कांग्रेस की कोशिशों पर आरजेडी ने भी दो टूक जवाब दिया है. पार्टी के विधायक राहुल तिवारी ने कहा है कि आरजेडी ने हमेशा गठबंधन धर्म का पालन किया है. तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव पर गठबंधन धर्म का पालन नहीं करने का आरोप बिलकुल गलत है. हमने कांग्रेस की परंपरागत सीट किशनगंज और समस्तीपुर में अपने कैंडिडेट नहीं दिये हैं. यहां तक कि हमने नीतीश कुमार के साथ भी अपना गंठबंधन धर्म निभाया था. 2015 चुनाव के बाद वादा के मुताबिक नीतीश कुमार को सीएम बनाया था. इसलिए आरजेडी पर किसी तरह का आरोप बिलकुल गलत है.

इससे पहले गुरुवार को ही आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी महागठबंधन को बचाने के लिए सहयोगी दलों के साथ मान मनौव्वल की बात कही थी. वहीं शिवानंद तिवारी ने भी कहा था कि आरजेडी कांग्रेस को मजबूत होते देखना चाहती है. लेकिन राज्यों में कांग्रेस अपने सहयोगी दलों को कमजोर कर अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर सकती है कि बात कही थी.

गौरतलब है कि विधानसभा की पांच सीटों और  लोकसभा की एक सीट पर उपचुनाव होने हैं. उम्मीद की जा रही थी की सीट शेयरिंग को लेकर महागठबंधन की बैठक होगी. लेकिन आरजेडी ने विधानसभा की चार सीटों पर महागठबंधन में बिना बातचीत किये अपने कैंडिडेट को सिंबल दे दिया. आरजेडी ने नाथनगर से राबिया खातून, बेलहर से रामदेव यादव, सिमरी बख्तियारपुर से जफर आलम और दरौंधा से उमेश सिंह को सिंबल दे दिया है. इधर एक सीट पर चुनाव लडने को लेकर अडे जीतन राम मांझी ने भी नाथनगर सीट से अपने कैंडिडेट अजय राय को मैदान में उतार दिया है. 

वहीं, वीआईपी पार्टी के मुकेश सहनी ने भी सिमरी बख्तियारपुर से दिनेश निषाद को मैदान में उतार दिया है. जबकि कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों की बेवफाई से नाराज होकर विधानसभा की सभी पांच सीटों पर अपने कैंडिडेट उतारने का प्रस्ताव आलाकमान को उम्मीदवारों के नाम के साथ भेज दिया है.

कांग्रेस इलेक्सन कमिटि की बैठक शनिवार 28 तारीख को दिल्ली में होनी है. इस बीच तेजस्वी यादव भी दिल्ली में ही हैं. वहीं बिहार कांग्रेस प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल भी दिल्ली पहुंच चुके हैं. ऐसे में सबकी निगाहें अब सोनिया गांधी पर टिकी हुई हैं. क्योंकि सोनिया गांधी का ही फैसला अब बिहार में महागठबंधन को बचा सकता है. अगर कांग्रेस पांचों सीट पर लडने के लिए उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर देती है तो वो घोषणा ही महागठबंधन की ताबूत में आखिरी कील साबित होगा.