बिहार: नहीं हो सकी औद्योगिक नीति की समीक्षा, उद्यमी लगातार कर रहे हैं विरोध

सरकार ने नयी नीति को लागू कर दिया, जिसके बाद से उद्यमी नीति में बदलाव की मांग करने लगे. तो सरकार ने 2018 में उद्योग नीति की समीक्षा की बात कही, लेकिन 2019 भी अब अंतिम चरण में है, लेकिन उद्योग नीति की समीक्षा का काम पूरा नहीं हो पाया है.

बिहार: नहीं हो सकी औद्योगिक नीति की समीक्षा, उद्यमी लगातार कर रहे हैं विरोध
बिहार सरकार अभी तक नहीं कर सकी है औद्योगिक नीति की समीक्षा. (फाइल फोटो)

पटना: 2016 में बनी बिहार औद्योगिक नीति की समीक्षा की बात सरकार साल भर पहले से कर रही है, लेकिन अब तक समीक्षा नहीं हो पायी है. समीक्षा को लेकर लेकर औद्योगिक संगठन और विपक्ष सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं, तो सरकार का कहना है कि नीति में बदलाव की तैयारी कर ली गयी है, जल्द ही इसे कैबिनेट से पास करवाकर अमली जामा पहनाया जायेगा.

बिहार में निवेश के मुद्दे पर सरकार हमेशा से घिरी रही है. जो छोटे उद्योग लगे हैं, उनको लेकर भी उद्यमी लगातार सरकार से शिकायत करते रहे हैं. 2016 में नयी उद्योग नीति बनी, तो उद्यमियों की ओर से इसका विरोध किया गया. कहा गया कि अगर सरकार 2011 की पॉलिसी को बेहतर नहीं कर सकती है, तो पुरानी पॉलिसी को ही लागू रहने दिया जाये.

सरकार ने नयी नीति को लागू कर दिया, जिसके बाद से उद्यमी नीति में बदलाव की मांग करने लगे. तो सरकार ने 2018 में उद्योग नीति की समीक्षा की बात कही, लेकिन 2019 भी अब अंतिम चरण में है, लेकिन उद्योग नीति की समीक्षा का काम पूरा नहीं हो पाया है.

नयी उद्योग नीति लागू होने के बाद बिहार में 14 हजार करोड़ से ज्यादा के निवेश के प्रस्ताव मिले हैं. इसमें छोटे और मझोले उद्योग ज्यादा हैं, लेकिन उद्यमी अपनी मांगों पर कायम हैं. वो सरकार से जीएसटी के रिफंड की मांग समेत बिजली और डीजी सेट में अनुदान समेत कई तरह की मांग कर रहे हैं. इनका कहना है कि सरकार ने आश्वासन दिया और उसने ही अब तक पूरा नहीं किया है, जबकि वैट की कर प्रणाली अब जीएसटी में बदल गयी है. उद्यमियों की बात से विपक्षी दल भी सहमत हैं और सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं.

आरोप-प्रत्यारोप के बीच उद्योग विभाग सफाई दे रहा है. कह रहा है कि लंबे समय से समीक्षा की प्रक्रिया चल रही है. तीन बार वित्त मंत्रालय से फाइल लौटी है, लेकिन जल्द ही समीक्षा का काम पूरा कर लिया जायेगा.

अगर सरकार उद्योग नीति की समीक्षा कर उसे लागू करती है, तो उद्यमियों के लिए जीएसटी के रिफंड का फायदा मिलने लगेगा, जिससे उनकी सालों पुरानी लंबित मांग पूरी हो जायेगी, लेकिन बिजली और डीजी सेट जैसी अन्य सुविधाओं की मांग बनी रहेगी.