बिहार के मिथिला की होली का अलग अंदाज, गानों के जरिए 'सीता-राम' किए जाते हैं याद
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बिहार के मिथिला की होली का अलग अंदाज, गानों के जरिए 'सीता-राम' किए जाते हैं याद

Mithala Holi: मिथला में भगवान राम का ससुराल है. यहीं पर महादेव का भी ससुराल भी है. इसलिए यहां के लोग होली पर्व पर आधारित गानों में भगवान राम और महादेव के नाम से होली गीत गाते हैं. 

 

बिहार के मिथिला की होली का अलग अंदाज, गानों के जरिए 'सीता-राम' किए जाते हैं याद

Darbhanga:  मिथला में होली (Hol i2021) फाल्गुन मास में होली का पर्व मनाया जाता है. यहां होली पारंपरिक तरीके से मनाई जाती है. इस वर्ष भी 28 मार्च को होलिका दहन के साथ 29 मार्च को होली खेली जाएगी. जगत जननी माता जानकी की धरती मिथिला में भी होली बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है. यहां के लोग वर्षो से पारंपरिक तरीके से होली खेलते आए हैं. इस मौके पर विभिन्न देवी-देवताओं द्वारा होली खेलने के गीत गाए जाते हैं. 

राम-महादेव के नाम पर होली के गीत गाते हैं

मिथला की पावन धरती जो भगवान राम का ससुराल भी है, वहीं, मिथला की पावन धरती पर महादेव का भी ससुराल भी है. इसलिए यहां के लोग होली पर्व पर आधारित गानों में भगवान राम और महादेव के नाम से होली गीत गाते हैं. यहां के लोक गायन में भगवान कृष्ण का नाम भी दिखता है, लेकिन अधिकतम लोग सीता मैया, रामचन्द्र, माता पार्वती और महादेव के नाम से होली गीत गाते हैं. यहां साथ में जोगिरा गाने की भी पंरपरा है.

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मिथला में राम खेले होली मिथला में, बाबा हरिहरनाथ सोनपुर में रंग लुटे,

एक रंग लुटे बाबा हों कुशेश्वर नाथ, दूसर रंग लुटे बैजनाथ,

होली हिमक शिखर पर खेलत भोला लाल, जैसे मिथला के पारंपरिक लोक गीत गाये जाते हैं.

समय के साथ बदलती होली

होली का पर्व दरभंगा महाराज के समय में भी बड़े हर्षोल्लास के साथ दरबार में खेली जाती थी. समय के साथ अब होली खेलने का स्वरूप बदलता जा रहा है. पहले जहां पारंपरिक होली खेलते थे, वहीं, अब होली कृत्रिम रंगों से खेली जाती है. इस पर्व के मौके पर घरों में पूआ- पकवान के साथ ही मांसाहारी भोजन बनाये जाते है. होली पर्व को लेकर महीनों पहले से ही ग्रामीण क्षेत्रों में होली गीतों की शुरुआत हो चुकी हैं. लोग डंफे और ढोल-मृदंग के साथ होली की गीत गा रहे हैं. होली से पूर्व होलिका दहन किया जाता है. जिसमें लोग चौक-चौराहों पर जलावन इकट्ठा कर उसे आग के हवाले करते हैं ,और इसके साथ ही होलिका दहन का रस्म अदा होता है.

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(इनपुट-मुकेश कुमार)

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