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ब‍िहार में बंटी कांग्रेस, जिलाध्‍यक्षों की मांग कांग्रेस अकेले लड़े, प्रदेश अध्‍यक्ष के महागठबंधन पक्ष में

बि‍हार में कांग्रेस के जिलाध्यक्षों ने महागठबंधन को खारिज किया. प्रदेश अध्यक्ष बोले-मजबूत है महागठबंधन. राहुल को अध्यक्ष बनाये रखने को प्रस्ताव भी हुआ पारित.

ब‍िहार में बंटी कांग्रेस, जिलाध्‍यक्षों की मांग कांग्रेस अकेले लड़े, प्रदेश अध्‍यक्ष के महागठबंधन पक्ष में

पटना: बिहार में कांग्रेस महागठबंधन के नाम पर बंट गई है. पार्टी का कोई भी जिलाध्यक्ष महागठबंधन रखने के मूड में नही है, लेकिन प्रदेश नेतृत्व महागठबंधन हर हाल में बनाये रखने के पक्ष में है. कांग्रेस जिलाध्यक्षों की हुई बैठक के बाद कुछ ऐसी ही तस्वीर निकल कर सामने आई है. इसके बाद ये अनुमान लगाया जा रहा है कि बिहार में कांग्रेस का कुछ नही हो सकता.

 

लोकसभा चुनाव में हार को लेकर रविवार को सदाकत आश्रम में बिहार कांग्रेस की समीक्षा बैठक काफी हंगामेदार रही. 40 में से 38 जिलों से आये जिलाध्यक्षो ने एक सिरे से महागठबंधन के फार्मूले को फेल करार दिया. ज्यादातर जिलाध्यक्षों का मानना था कि कांग्रेस को अकेले चुनावी मैदान में अब जाना चाहिए.

 

बैठक में शामिल होने पहुंचे सारण जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पूरे चुनाव के दौरान RJD ने उनकी खोज खबर ही नहीं ली. उन्होंने कई बार मदद के लिए संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. वहीं आरा और औरंगाबाद के जिलाध्यक्षों ने गठबंधन में गलत पार्टी को टिकट मिल जाने को हार की वजह बताई. मुंगेर के जिलाध्यक्ष ने कहा कि महागठबंधन तो बना, लेकिन सहयोगी दलों का वोट ट्रान्सफर ही नहीं हो पाया जबकि बेगुसराय और पूर्णिया की जिलाध्यक्ष ने कांग्रेस के अकेले चुनावी मैदान में जाने की खुलकर वकालत की. वहीं कांग्रेस सांसद अखिलेश सिंह ने भी माना कि गलती हुई है. पार्टी को मिथिलांचल की एक सीट मिलनी चाहिए थी.

कांग्रेस की समीक्षा बैठक 3 घंटे चली. बैठक में सभी जिलाध्यक्षों की महागठबंधन और हार को लेकर कमोबेश एक ही राय थी. लेकिन सबका सवाल चुनाव में चुनाव अभियान समिति के चेयरमैन अखिलेश सिंह की भूमिका को लेकर था. आरएलएसपी से अपने बेटे को टिकट दिलाने और अपने लोगों का टिकट काटकर सहयोगी दलों को ज्यादा सीट दिलाने का आरोप अखिलेश सिंह पर लगा.

अखिलेश सिंह ने पूरे मामले पर अपनी सफाई भी दी. पार्टी के लिए उन्होंने अब तक क्या क्या किया इसका पूरा हिसाब किताब भी दिया. अखिलेश सिंह ने फरवरी में गांधी मैदान में हुई रैली की सफलता के लिए अपने किए गए प्रयासों के बारे में सबको बताया. अखिलेश सिंह ने कहा कि गांधी मैदान की रैली को सफल बनाने के लिए मैंने सबसे ज्यादा पैसा लगाया. बाहरी उम्मीदवारों को टिकट दिलाने के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि उन्होंने बेहतर उम्मीदवार पार्टी को दिए. अगर वो उम्मीदवार अच्छे नहीं थे तो अमेरिका से उम्मीदवार नहीं आते. अखिलेश सिंह ने लालू प्रसाद और आरजेडी के साथ हुए गठबन्धन के पक्ष में पूरी वकालत की.

इधर मीटिंग के बाद अध्यक्ष मदन मोहन झा ने भी महागठबंधन को मजबूत करार दिया. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, बिहार में महागठबंधन मजूबत है. गठबंधन में कोई परेशानी नहीं. जमीनी स्तर पर सहयोगी दलों के साथ तालमेल नहीं हो पाने की वजह से परेशानी हुई है.
आगे वो विधायक दल के साथ भी बैठक करेंगे और सब की राय से आलाकमान को अवगत करा देंगे. बैठक में सभी जिलाध्यक्षो ने सर्वसम्मति से राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये रखने का प्रस्ताव भी पारित किया.