close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

जाति बंधन, गुटबाजी और राजनीति में फंसी बिहार पुलिस- डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय

बिहार डीजीपी ने कहा बिहार पुलिस में निचले स्तर पर जातीय बंधन हैं.

जाति बंधन, गुटबाजी और राजनीति में फंसी बिहार पुलिस- डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय
डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने बिहार पुलिस के कर्मियों से अपील की है.

पटनाः बिहार पुलिस जाति बंधन, गुटबाजी, राजनीति, मजहबी बंधन में बंधी है. शायद आपको इस बात पर यकीन न हो. लेकिन बिहार पुलिस के नए मुखिया डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को इन्हीं समस्याओं से दो चार होना पर रहा है. मजबूरन उन्हें बिहार पुलिस के कर्मियों और अधिकारियों से इन विवादों से दूर होकर एकजुट होने की अपील करनी पड़ रही है. 

उन्होंने खुलासा किया कि बिहार पुलिस में निचले स्तर पर जातीय बंधन हैं, इस बात की कई खबरें आय़ी हैं. जाति के आधारत पर मेस बंटे हुए हैं ये भी खबर आई है. जाति के आधारत पर बैरक बंटते हैं इस खबर को भी मीडिया ने दिखाया है. लेकिन पुलिस महकमा का टॉप लेवल भी जातीय बंधन के चंगुल में है. इस बात का खुलासा हुआ है. पुलिस महकमा का टॉप लेवल सिर्फ जातीय बंधन में ही नहीं बंधा है बल्कि गुटबाजी, राजनीति, मजहबी बंधन का भी शिकार है. 

दरअसल, डीजीपी बिहार पुलिस सप्ताह के मौके पर बेहतर काम करनेवाले पुलिसकर्मियों के बीच पुरस्कार वितरण कर रहे थे. डीजीपी ने पुरस्कार वितरण के बाद डीजी से लेकर सिपाही तक को जाति बंधन, गुटबाजी, राजनीति, मजहबी बंधन से उबरकर एकजुट होने की अपील की. डीजीपी ने कहा कि हमें ऐसा माहौल पेश करना चाहिए की पूरे देश में बिहार पुलिस का नाम रौशन हो. 

इधर डीजीपी के बयान के बाद कयाशों का बाजार गर्म हो चुका है. खुले तौर पर कोई भी अधिकारी डीजीपी की ओर से कहे गए बयानों का सर्मथन नहीं कर रहा है. बिहार सरकार के प्रशासनिक महकमों में बड़े ओहदे पर रह चुके पूर्व आईएएस अधिकारी व्यास, डीजीपी की ओर से दिये गये बयान को शब्दों के चयन में चूक मानते हैं. उनका कहना है कि उन्हें अपनी सर्विस के दौरान इस तरह की बातों का सामना नहीं करना पडा है. 

पूर्व आईपीएस अधिकारी श्रीधर मंडल भी पुलिस महकमे में टॉप लेवल पर इस तरह की बातों को सिरे से खारिज करते हैं. हलांकि मंडल इतना जरुर कहते हैं कि वर्तमान डीजीपी को अगर इस तरह का अनुभव हुआ होगा तभी वो इन बातों का जिक्र कर रहे हैं. 

गुप्तेश्वर पाण्डेय को बिहार पुलिस के डीजीपी की जिम्मेवारी उस वक्त मिली है जब बिहार में लॉ एण्ड आर्डर को लेकर लगातार सवाल खडे हो रहे हैं. ऐसे में डीजीपी पुलिस महकमे को चुस्त दुरुस्त बनाने में लगे हैं. लेकिन जिन मुद्दों पर वो बिहार पुलिस के सिपाही से लेकर अधिकारियों को सचेत करने में जुटे हैं वो मुद्दे पुलिस महकमें की सेहत के लिए ठीक नहीं. अगर ये मुद्दे वाकई बिहार पुलिस में अपनी जड़ बना रहे हैं तो फिर पुलिस से न्याय की उम्मीद बेमानी हो जाएगी.