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सुनो, सुनो, सुनो..बिहार में अगर खेतों में पराली जलाया तो नहीं मिलेगा सरकारी योजना का लाभ

फसल कटनी के बाद खेतों में पराली जलानेवालों को अब सरकारी योजना का लाभ नही मिलेगा.

सुनो, सुनो, सुनो..बिहार में अगर खेतों में पराली जलाया तो नहीं मिलेगा सरकारी योजना का लाभ

पटना: फसल कटनी के बाद खेतों में पराली जलानेवालों को अब सरकारी योजना का लाभ नही मिलेगा. सीएम नीतीश कुमार ने इसबात की घोषणा की है. हलांकि नीतीश कुमार ने किसानों को ये अभी आश्वासन दिया है कि खेतों के अवशेष का भी किसानों को कुछ आर्थिक फायदा हो जाय इसके प्रयाश किये जाएंगे. सरकार खेतों के अवशेषों के सही इस्तेमाल पर किसानों को वित्तीय अनुदान देने की योजना बनाएगी.नीतीश कुमार ने ये घोषणा कृषि विभाग की ओर से आयोजित दो दिनों के फसल अवशेष प्रबंधन के अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार के दौरान की.

नीतीश कुमार ने कहा खेतों में पराली जलाने का मामला पहले पंजाब हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक ही था. लेकिन अब बिहार के भी कई जिलों में के किसान खेतों में फसल अवशेष जलाने लगे हैं. जिसका पर्यावरण और स्वास्थ्य पर बेहद खराब असर हो रहा है. नीतीश कुमार ने कहा कि सबसे पहले रोहतास कैमूर के इलाकों में पराली जलाने की प्रवृत्ति देखी जा रही थी. उसके बाद इसका विस्तार नालंदा पटना तक हो गया. फिलहाल बिहार के आठ जिलों में किसान खेतों में पराली जला रहे हैं. जो चिंता का विषय है.

नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में पर्यावरण से अमून छेडछाड नहीं होता है. लेकिन देश के दूसरे राज्यों में पर्यावरण से छेडछाड के कारण जलवायु परिवर्तन हो रहा है. जिसका खामियाजा बिहार को भी भुगतना पर रहा है. पर्यावरण से छेडछाड का ही नतीजा है कि बिहार में जुलाई महीने में फ्लैश फल्ड आ गया.

उसी वक्त सूखा की भी स्थिती उत्पन्न हो गयी. सितंबर महीने में भीषण वर्षापात हो गयी. गंगा के जलस्तर में बढोतरी हुई और 12 जिले प्रभावित हो गये. पटना में 300 एमएम वर्षा हो गयी. ये सारे लक्षण जलवायु परिवर्तन के ही हैं इसलिए हमलोगों ने जल जीवन हरियाली अभियान की शुरुआत की है.

सीएम ने सेमिनार में आए विशेषज्ञों को सलाह दी की खेतों में पराली नहीं जलाने और फसल अवशेष को दुबारा इस्तेमाल में लाने से जुडे सुझाव सरकार को जरुर दें. ताकि किसानों को ज्यादा से ज्यादा जागरुक किया जा सके.

कार्यक्रम में मौजूद सुशील मोदी ने कहा कि बीते साल बिहार में 32 लाख टन पराली जलायी गयी थी. यूपी पंजाब और हरियाणा में बीते साल 4 करोड टन पराली जलाये गये. जिसके कारण भीषण वायु प्रदूषण हुआ. नवंबर दिसंबर जनवरी फरवरी में सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण की वजह खेतों में फसल अवशेष जलाना है.

डिप्टी सीएम ने कहा कि एक टन फसल अवशेष चलाने के बाद 2 किलोग्राम सल्फर डाईआक्साईड गैस निकलती है. तीन किलोग्राम पार्टिकुलेट मैटर 60 किलोग्राम कार्बन डाइआक्साईड 199 किलोग्राम राख पैदा होती है जो बेहद खतरनाक हैं.   

सुशील मोदी ने कहा कि पंजाब हरियाणा और यूपी को कृषि उपकरण खरीद पर किसानों को सब्सिडी देने के लिए केन्द्र सरकार की ओर 1152 करोड का प्रावधान किया जा रहा है. लेकिन बिहार में किसानों को कृषि उपकरण पर 80 फीसदी सब्सिडी सरकार अपने श्रोत से दे रही है. डिप्टी सीएम ने नीतीश कुमार से अपील की कि वो केन्द्र सरकार को पत्र लिखें और पंजाब हरियाणा और यूपी की तरह बिहार को भी कृषि उपकरण की खरीद के लिए मिलनेवाले ऋण पर केन्द्रीय सहायता उपलब्ध करायें.

कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि गलतफहमी में पराली जला रहे हैं. उन्हें लगता है कि खेत में पराली जलाने से खेत उपजाउ होगा . लेकिन हकीकत ये है कि पराली जलाने के कारण मिट्टी को कल्टीवेट करने वाले सभी कीडे आग के कारण नष्ट हो जाते हैं. मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है. स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है अलग. इसलिए विभाग किसानों को जागरुक करने का लगातार काम करेगा.
 
कृषि विभाग के दो दिनों तक चलनेवाले सेमिनार में देश और विदेशों के 96 कृषि विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं. आस्ट्रेलिया, नेपाल, फिलिपिन्स, इंडोनेसिया, बांग्लादेश से भी कृषि वैज्ञानिक सेमिनार में शामिल होने पहुंचे हैं. आस्ट्रेलिया के फसल वैज्ञानिक एरिक हर्टनर ने कहा कि पीएम मोदी ने किसानों की आमदनी को दोगुणा करने का लक्ष्य तय किया है.

लेकिन जबतक खेतों की जमीन सुरक्षित नहीं रहेगी उसका लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता. ऐसे में किसानों को क्लाईमेट चेंज और सॉयल फर्टलिटी मैनेजमेंट से जुडी चीजों को बताने की जरुरत है. सेमिनार में सभी जिलों से आये किसान भी शामिल हो रहे हैं.