प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए नीतीश सरकार का बड़ा फैसला

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए नीतीश सरकार का बड़ा फैसला

आए दिन निजी स्कूलों की मनमानी की चर्चा सामने आती रही है. प्रत्येक वर्ष एडमिशन के दौरान फीस, कॉपी-किताब और ड्रेस को लेकर हंगामा होता रहा है. 

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए नीतीश सरकार का बड़ा फैसला

पटना : बिहार विधानमंडल से निजी स्कूलों पर नकेल कसने का विधेयक पास हो चुका है. अब निजी स्कूल एक साल में सात फीसदी से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकेंगे. बच्चों और अभिभावकों को कॉपी-किताब और ड्रेस स्कूल से लेने के मजबूर नहीं कर सकेंगे और न ही मनमाना एडमिशन शुल्क ले पायेंगे. सरकार इस फैसले को अभिभावकों और स्वयं सेवी संगठनों की ओर से की जा रही मांग का नतीजा बता रही है. 

आए दिन निजी स्कूलों की मनमानी की चर्चा सामने आती रही है. प्रत्येक वर्ष एडमिशन के दौरान फीस, कॉपी-किताब और ड्रेस को लेकर हंगामा होता रहा है. अभिभावकों और स्वयं सेवी संगठनों की ओर से लंबे समय से निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाये जाने की मांग सरकार से की जाती रही है. इस मामले को लेकर पटना हाइकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की गयी थी, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुये सरकार को निर्देश दिये थे.

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प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ उठ रही आवाज को देखते हुये सरकार ने निजी स्कूलों में मनमाने फीस वृद्धि को रोकने के लिए अब कानून बना दिया है. कोई भी स्कूल अब सात फीसदी तक ही फीस बढ़ा सकेंगे.

विधानसभा और विधान परिषद से पास हुये विधेयक पर सत्ता और विपक्षी सदस्यों ने सहमति दी. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रदेश अध्यक्ष और एमएलसी रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि हमने बिल का समर्थन किया, लेकिन हमारा सरकार से एक सवाल भी है. आखिर क्या वजह है कि अभिभावक निजी स्कूलों में ही अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं. समान स्कूलिंग सिस्टम हमारी मांग रही है और सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिये, ताकि अभिभावक निजी स्कूलों की जगह पर सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजें. जब ऐसी स्थिति हो जायेगी, तो निजी स्कूलों की मनमानी पर अपने आप रोक लग जायेगी.

वहीं, सरकार की ओर से कहा गया कि भले ही फीस वृद्धि से संबंधित विधेयक पास हुआ है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि सरकार निजी स्कूलों के योगदान को कम करके आंक रही है. सरकार निजी स्कूलों से किसी तरह की लड़ाई भी मोल नहीं लेना चाहती है.

निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के 25 फीसदी नामांकन को जरूरी करने के बाद सरकार ने दूसरा बड़ा कदम उठाया है, जिससे हर साल मनमाने तरीके से होनेवाली फीस वृद्धि पर रोक लगेगी. इससे अभिभावकों को राहत मिलेगी.

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