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बिहार सरकार की तैयारी, 15 दिनों में पास होंगे आवासीय मकानों के नक्शे

संशोधन प्रस्ताव में फ्लोर एरिया रेशियो के हिसाब से निश्चित चौड़ाई वाली सड़क होने पर ही नक्शा पास किया जाएगा. विभिन्न शहरों के अंदर की सड़कों के रखरखाव पर भी जोर दिया गया है.

बिहार सरकार की तैयारी, 15 दिनों में पास होंगे आवासीय मकानों के नक्शे
बिल्डिंग बाइलॉज-2014 में संशोधन की तैयारी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पटना : केंद्रीय मानकों के अनुरूप बिहार के बिल्डिंग बाइलॉज-2014 में संशोधन की तैयारी है. प्रारूप तय कर लिया गया है. अब छोटे भूखंडों (आवासीय) के नक्शे आवेदन के 15 दिनों के भीतर पास होंगे. अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए अब विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. सिंगल विंडो सिस्टम के तहत आवेदकों के सारे काम और सारी जरूरतें एक जगह से पूरी हो जाएंगी. बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने प्रस्तावित बिल्डिंग बाइलॉज की नगर एवं आवास विकास विभाग की ओर से प्रस्तुति दी गई.

संशोधन प्रस्ताव में फ्लोर एरिया रेशियो के हिसाब से निश्चित चौड़ाई वाली सड़क होने पर ही नक्शा पास किया जाएगा. विभिन्न शहरों के अंदर की सड़कों के रखरखाव पर भी जोर दिया गया है. इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा है कि इन सड़कों को टूट-फूट से बचाने के लिए विभाग को ही प्राथमिकता के आधार पर काम करना होगा.

इसके अलावा स्मार्ट सिटी योजना के तहत गांधी मैदान और उसके आसपास के इलाकों के सुंदरीकरण के लिए भवनों पर बेहतर लाइटिंग की व्यवस्था की जाएगी. गांधीजी की मूर्ति के पास खासतौर पर ऐसा किया जाएगा ताकि यह आकर्षक दिख सके. ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के भवनों का मूल स्वरूप बनाए रखा जाएगा. होटल मौर्या के पास ऐसी व्यवस्था की जाए ताकि शाम के वक्त लोग वहां आना पसंद करें. विभिन्न शहरों की धरोहरों के संरक्षण पर मुख्य रूप से फोकस किया गया है.

नई बिल्डिंग बाइलॉज में जल संरक्षण पर मुख्य रूप से फोकस किया गया है. रेन वाटर हार्वेस्टिंग योजना के तहत वर्षा जल को बर्बाद होने से बचाने के उपायों की चर्चा की गई है. प्रस्तुति के दौरान भूमिगत जल के बारे में भी मुख्यमंत्री को विस्तार से बताया गया. बड़े भवनों में अनिवार्य रूप से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की व्यवस्था करनी होगी. रिवर फ्रंट के गांवों के बाहरी क्षेत्र में ही शहर के विस्तार का प्रस्ताव है, ताकि लोगों को विस्थापित न होना पड़े. 

केंद्र की गाइडलाइन में रिवर फ्रंट के सौ मीटर तक निर्माण प्रतिबंधित है. किंतु बिहार में इतने एरिया में ही कई शहरों का बसावट है. ऐसे में भौतिक सर्वेक्षण के बाद ही बदलाव की इजाजत दी जाए.