बिहार सरकार बनाएगी शिव सर्किट, लखीसराय के अशोकधाम भी होगा शामिल : मंत्री

सावन की पहली सोमवारी पर राज्य के पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार पूजा अर्चना करने के लिए अशोकधाम मंदिर पहुंचे.

बिहार सरकार बनाएगी शिव सर्किट, लखीसराय के अशोकधाम भी होगा शामिल : मंत्री
पर्यटन मंत्री ने की घोषणा. (फाइल फोटो)

लखीसराय : लखीसराय जिला धार्मिक, सांस्कृतिक, पौराणिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी समृद्ध माना जाता है. देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर के झारखंड राज्य में चले जाने के बाद लखीसराय नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत श्री इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर अशोकधाम को बिहार का बाबाधाम माना जाता है. इस मंदिर में भगवान शंकर का विशाल शिवलिंग स्थापित है. बताया जाता है यह शिवलिंग पौराणिक है. इस मंदिर को पर्यटक स्थल घोषित करने की मांग वर्षों से की जा रही है. 

सावन की पहली सोमवारी पर राज्य के पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार पूजा अर्चना करने के लिए अशोकधाम मंदिर पहुंचे. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लखीसराय जिला स्थित अशोकधाम मंदिर सहित राज्य के सभी शिव मंदिरों को जोड़कर बिहार सरकार शिव सर्किट बनाने जा रही है. मंत्री ने कहा कि राज्य के ऐतिहासिक अशोकधाम, गरीबनाथ, अजगैबीनाथ, धनेश्वरनाथ, सोमेश्वरनाथ सहित सभी शिव मंदिरों को जोड़कर शिव सर्किट बनाया जा रहा है.

मंत्री ने अशोकधाम मंदिर को पर्यटक स्थल घोषित करने संबंधी पत्रकारों के सवाल पर कहा कि लखीसराय के ऐतिहासिक और पौराणिक अशोकधाम मंदिर सहित बड़हिया के जगदम्बा मंदिर सहित अन्य 11-12 ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों को पर्यटन रोड मैप से जोड़ दिया गया है. इसके विकास की योजना के लिए डीएम को पत्र लिखा गया है.

पर्यटन मंत्री के साथ बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री-सह-जिले के प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार और स्थानीय विधायक-सह-सूबे के श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिंहा भी भगवान शिव की पूजा-अर्चना की. पूजा करने के बाद ग्रामीण विकास मंत्री सह जिले के प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि अशोकधाम मंदिर की चर्चा सिर्फ लखीसराय जिले और बिहार तक ही सीमित नहीं है बल्कि अन्य राज्यों और देश-विदेश में भी हो रही है.

अशोधाम मंदिर में सपत्नि पूजा-अर्चना करने के बाद स्थानीय विधायक-सह-बिहार सरकार में श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिंहा ने कहा कि 21वीं सदी में अशोधाम मंदिर विश्व मानचित्र पर अपना स्थान बनाएगा. इसके साथ जिले में कई अन्य ऐतिहासिक व पौराणिक स्थल है जो आने वाले समय में 21वीं सदी में विश्व मानचित्र पर दिखेगा.