प्रदूषण रोकने जारी हुआ 10 वर्षों का एक्शन प्लान, बिहार सरकार ने लिए कई अहम फैसले

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी (Sushil Modi) ने पटना के प्रदूषण के लिए गाड़ियों और कंस्ट्रक्शन को जिम्मेवार मानने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा है कि लोगों में प्रदूषण को लेकर आतंक फैलाने की बजाय, उन्हें जागरूक करने की ज्यादा जरूरत है.

प्रदूषण रोकने जारी हुआ 10 वर्षों का एक्शन प्लान, बिहार सरकार ने लिए कई अहम फैसले
उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने जारी किया एक्शन प्लान.

पटना: बिहार की राजधानी पटना में वायु प्रदूषण (Air Pollution) का स्तर काफी अलार्मिंग हैं. पटना में हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए अगले 10 वर्षों का एक्शन प्लान जारी किया गया है. विशेषज्ञों का दावा हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुई तो अगले 10 वर्षों में 15 हजार लोगों की मौत प्रदूषण से हो सकती है. वहीं, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी (Sushil Modi) ने पटना के प्रदूषण के लिए गाड़ियों और कंस्ट्रक्शन को जिम्मेवार मानने से इंकार कर दिया है. उन्होंने कहा है कि लोगों में प्रदूषण को लेकर आतंक फैलाने की बजाय, उन्हें जागरूक करने की ज्यादा जरूरत है.

बिहार में धूलकण लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ने वाली है. लोग और सरकार अगर प्रदूषण को लेकर सजग नहीं हुई तो बड़ी आबादी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. शनिवार को पटना में हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए अगले 10 वर्षों का एक्शन प्लान जारी किया गया. पर्यावरण और एयर पॉल्यूशन पर रिसर्च करने वाली छह संस्थाओं के साथ मिलकर आद्री ने रिपोर्ट तैयार किया है.

इस मौके पर बिहार पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन अशोक घोष ने पटना में लगातर बढ़ रहे पीएम 2.5 की ग्राफ पर चिंता जतायी. अशोक घोष ने कहा कि पीएम 2.5 का ग्राफ अगर इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले 10 वर्षों में प्रदूषण के कारण 15 हजार लोगों की जानें जा सकती हैं. सरकार की ओर से कई प्रिवेंटिव एक्शन लिये गये हैं, लेकिन उन्हें सख्ती से जमीन पर उतारने की जरूरत है.

वहीं, डोमेन लीड एयर पॉल्यूशन संस्था की रिसर्च साइंटिस्ट प्रतिमा सिंह ने 10 वर्षों के लिए तैयार एक्शन प्लान लोगों के सामने पेश किया. उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण में सबसे बड़ी भूमिका ट्रान्सपोर्टेशन की होती है. इसके जरिये होने वाले प्रदूषण का हिस्सा लगभग 88 फीसदी है. उसके बाद ईंट भट्ठों का नंबर आता है. 30 प्रतिशत लोग अभी भी खाना बनाने के लिए पारंपरिक चूल्हों का ही इस्तेमाल करते हैं.

वायु प्रदूषण में सुधार के लिए किये जाने वाले कामों का जिक्र करते हुए प्रतिमा सिंह ने बताया कि सबसे पहले बसों को सीएनजी में कन्वर्ट करने या फिर इलेक्ट्रिक करने की जरुरत है. ट्रकों के इंजन में भी पॉल्यूशन कंट्रोल वाले किट लगें. डीजल जेनरेटर पर पाबंदी हो. ईंट भट्ठों पर निगरानी की व्यवस्था हो. कचड़ा जलाने पर रोक लगे. इंडस्ट्री में ऑनलाइन पॉल्यूशन जांच की व्यवस्था हो. पराली जलाने पर पाबंदी लगायी जाए. कंस्ट्रक्शन के दौरान वायु प्रदूषण के नियमों का सख्ती से पालन किया जाय.

कार्यक्रम में मौजूद वन पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार ने कहा कि बिहार में पॉल्यूशन सिर्फ पटना, गया और मुजफ्फरपुर शहर तक ही सीमित नहीं बल्कि, सभी शहरों का कमोबेश ऐसा ही हला है. पॉल्यूशन कंट्रोल को लेकर कानून पहले से बने हुए हैं, लेकिन नियमों का पालन नहीं हो पा रहा. पुलिसिंग के जरिये सबकुछ नहीं किया जा सकता. लोगों का जागरूक होना जरूरी है.

कार्यक्रम में चीफ गेस्ट के रुप में मौजूद डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने विशेषज्ञों से पॉल्यूशन के नाम पर लोगों में आतंक नहीं फैलाने की अपील की. सुशील मोदी ने कहा कि वायु प्रदूषण के अगर आंकड़ों को देखा जाय तो 2016 से अबतक लगातार सुधार हुआ है. सुशील मोदी ने पटना में ट्रान्सपोर्टेशन और कंस्ट्रक्शन के कारण वायु प्रदूषण के दावों को खारिज किया है.

सुशील मोदी ने कहा है कि पटना में गाड़ियां पूरे साल चलती हैं. निर्माण कार्य भी पूरे साल होता है. लेकिन प्रदूषण का ग्राफ सिर्फ ठंड में ही क्यों बढ़ता है. मोदी ने दावा किया है कि वायु प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह खुद हवा है. मोदी ने दावा किया है कि हवा के डायरेक्शन, हवा की गति, वातावरण का तापमान, वर्षा, हवा में आद्रता प्रदूषण को प्रभावित करते हैं.

वायु प्रदूषण रोकने के लिए भविष्य में लिये जाने वाले फैसले:

  • बिहार में प्रदूषण जांच केन्द्र खोलने के लिए अब इंजीनियरिंग की डिग्री जरूरी नहीं होगी. कोई भी साइंस इंटर पास व्यक्ति जांच केंद्र खोलने के लिए लाइसेंस ले सकेगा. जल्द ही फैसले का प्रस्ताव कैबिनेट में पास होगा.
  • इसके अलाव अब पुलिस या फिर ट्रांसपोर्ट ऑफिसर केवल गाड़ी के कागजात की चेकिंग नहीं करेंगे बल्कि, गाड़ी के वास्तविक हालात की भी चेकिंग करेंगे. ताकि फर्जी कागजात बनाकर कोई पॉल्यूशन फैलाने वाली गाड़ी का इस्तेमाल न कर सके.
  • आगामी 10 दिसंबर तक पटना में तीन नये अतिरिक्त सीएनजी स्टेशन खुलेंगे.
  • मार्च 2020 तक पटना में सीएनजी स्टेशनों की संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी.
  • सरकार 10 नई इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने जा रही है. मुख्य सचिव, डीजीपी, सरकारी विभागों के प्रधान सचिव अब इलेक्ट्रिक गाड़ियों का ही इस्तेमाल करेंगे.
  • पटना में पांच जगहों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स मापने के लिए नये मॉनिटरिंग स्टेशन 15 दिसंबर तक लगा दिये जाएंगे. ताकि वायु प्रदूषण की सही जानकारी हासिल हो सके. अभी पटना में केवल एक ही मॉनिटरिंग स्टेशन है.