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अधिकारी ने किया कुपोषण मुक्त बिहार बनाने का दावा, राज्यपाल ने दिखा दिया आईना

कार्यक्रम का आयोजन समाज कल्याण विभाग की ओर से किया गया था, लेकिन राज्यपाल फागू चौहान (Phagu Chauhan) ने विभाग के अधिकारियों को कुपोषण को लेकर आईना भी दिखा दिया.

अधिकारी ने किया कुपोषण मुक्त बिहार बनाने का दावा, राज्यपाल ने दिखा दिया आईना
राज्यपाल फागू चौहान ने की बिहार में राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत.

पटना : गुरुवार को बिहार सरकार की ओर से राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत की गई. इसके लिए राजभवन में अन्नप्राशन समारोह का आयोजन भी किया गया. कार्यक्रम का आयोजन समाज कल्याण विभाग की ओर से किया गया था, लेकिन राज्यपाल फागू चौहान (Phagu Chauhan) ने विभाग के अधिकारियों को कुपोषण को लेकर आईना भी दिखा दिया.

बिहार के अपर मुख्य सचिव का दावा था कि आने वाले दो से तीन वर्षों में बिहार को कुपोषण मुक्त कर देंगे. इसके लिए जन जागरुकता का सहारा लिया जाएगा. वहीं, राज्यपाल ने यह कहकर अधिकारी को आईना दिखा दिया कि सिर्फ जागरुकता से कुपोषण खत्म नहीं होगा. गरीबों को बुनियादी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए. 

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बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए गुरुवार को राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत की गई. समाज कल्याण विभाग की ओर से पटना के राजभवन में अन्नप्राशन समारोह का आयोजन किया गया. 'सही पोषण, देश रौशन' के नारे के साथ अभियान की शुरुआत की गई. बिहार में राज्यपाल के हाथों अभियान की शुरुआत की गई. जिसमें कई नवजात शिशुओं को राज्यपाल फागू चौहान के हाथों अन्नप्राशन कराया गया. 

इस मौके पर समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अतुल प्रसाद ने कहा कि छह महीने तक के बच्चों को संपूर्ण पोषण देने के लिए इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. गर्भ धारण से लेकर आने वाले एक हजार दिन बच्चे और मां के लिए बेहद अहम होते हैं. जन्म के छह महीने तक मां का दूध ही अहम होता है. छह महीने के बाद बच्चों में पोषाहार की जरूरत पड़ती है. ऐसी योजना बच्चों के लिए कारगर साबित होती है. हमारा लक्ष्य है कि 2 से तीन सालों में बिहार को कुपोषण मुक्त कर लिया जाएगा. 

कार्यक्रम में मौजूद राज्यपाल ने अधिकारियों की बातों को काफी ध्यान से सुना. लेकिन अपने अनुभव के जरिये उनको आईना भी दिखा दिया. राज्यपाल फागू चौहान ने कहा कि हमारे देश के अंदर एक बहुत बड़ी संख्या है, जो कुपोषण के शिकार है. कई परिवार तो ऐसे हैं जिन्हें भरपेट खाना भी नहीं मिलता है. यहां तक कि सुविधाओं के आभाव में कई बच्चे या फिर मां बच्चे दोनों की मौत हो जाती है. कुपोषण को लेकर सिर्फ जागरुकता अभियान चलाने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता. गरीब जरुरतमंदों तक बनियादी सुविधाएं पहुंचाना भी लक्ष्य होना चाहिए. इशारों ही इशारों में राज्यपाल ने अधिकारियों को सरकारी योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने की नसीहत दे डाली.