रोजगार के लिए शहर वापसी को तैयार प्रवासी श्रमिक, बिहार में बंदी-बाढ़ बनी समस्या

बिहार के कई इलाके इस समय बाढ़ प्रभावित हैं, जहां मजदूरों के पास कोई रोजगार नहीं है, इसलिए वे आना चाहते हैं, लेकिन वे आ नहीं पा रहे हैं.

रोजगार के लिए शहर वापसी को तैयार प्रवासी श्रमिक, बिहार में बंदी-बाढ़ बनी समस्या
रोजगार के लिए शहर वापसी को तैयार प्रवासी श्रमिक, बिहार में बंदी-बाढ़ बनी समस्या.

पटना: कोरोना (Corona) का कहर अभी थमा नहीं है, लेकिन रोजी-रोटी के खातिर प्रवासी (Migrants) दोबारा औद्योगिक शहरों का रुख करने लगे हैं. कारोबारी बताते हैं कि, अधिकांश मजदूर लौटने को तैयार हैं, लेकिन रेल सेवा सुचारु ढंग से बहाल नहीं होने के कारण, वे नहीं आ पा रहे हैं.

दिल्ली के ओखला चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के चेयरमैन अरुण पोपली ने कहा कि, घर लौटे अधिकांश मजदूर वापस आना चाहते हैं, क्योंकि उनको मालूम है कि फैक्टरियां खुल गई हैं, लेकिन ट्रेनें नहीं खुलने के कारण, वे नहीं आ पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि, जिनको आने का साधन मिल रहा है वे लौट रहे हैं.

कारोबारी बताते हैं कि, अगर ट्रेन सेवा सुचारु हो जाए तो, जो मजदूर गांव लौटे हैं, उनमें से ज्यादातर वापस शहर आ जाएंगे, क्योंकि बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण मजदूरों के पास कोई काम नहीं है.

दिल्ली के मायापुरी इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी नीरज सहगल ने बताया कि, बिहार में कोरोना का प्रकोप बढ़ने के कारण लॉकडाउन (Lockdown) है और रेल सेवा भी सुचारु नहीं हुई है. इसलिए मजदूर नहीं आ पा रहे हैं, लेकिन वे वापसी करने को तैयार हैं.

उन्होंने कहा कि ज्यादातर मजदूर बिहार और उत्तर प्रदेश से आते हैं और बिहार के कई इलाके इस समय बाढ़ (Flood) प्रभावित हैं, जहां मजदूरों के पास कोई रोजगार नहीं है, इसलिए वे आना चाहते हैं, लेकिन वे आ नहीं पा रहे हैं.

दरअसल, इस समय सीमित संख्या में ट्रेनें चल रही हैं, जिनमें सफर करने के लिए रिजर्वेशन करवाना पड़ता है, लेकिन मजदूर ज्यादातर जनरल टिकट लेकर सफर करते हैं. एनसीआर स्थित साहिबाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रेसीडेंट दिनेश मित्तल ने कहा कि, मजदूर जनरल टिकट लेकर चलते हैं, इसलिए वे नहीं आ पा रहे हैं, लेकिन गांवों में अब वे टिकना नहीं चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि, गांवों में अब खेती का काम भी समाप्त हो गया है, इसलिए मजदूरों के पास कोई विशेष काम नहीं है. आवागमन की सुविधा जैसे ही मिलेगी मजदूरों की भारी संख्या में वापसी शुरू हो जाएगी. 

हालांकि, गांवों में इन दिनों प्रवासी मजदूरों को आजीविका का साधन मुहैया करवाने के लिए, गरीब कल्याण रोजगार अभियान, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) समेत कई अन्य योजनाओं पर सरकार ने विशेष जोर दिया है, लेकिन कारोबारी बताते हैं कि, फैक्टरियों में काम करने वाले मजदूरों को जब मालूम होगा कि फैक्टरियां चल रही हैं तो वे, गांवों में नहीं टिकेंगे.

कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के मद्देनजर 25 मार्च को जब देश में पूर्णबंदी हुई थी. तब अधिकांश कल-कारखाने बंद होने के साथ-साथ रेल और बस सेवा समेत यात्रियों के लिए, तमाम सार्वजनिक परिवहन सेवा ठप होने के कारण प्रवासी श्रमिक पैदल ही, घर वापसी करने लगे थे, जिसके बाद केंद्र और राज्यों की सरकारों ने उनकी वापसी के लिए विशेष व्यवस्था की और श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं.

कारोबारी बताते हैं कि, अगर इसी प्रकार मजदूरों को गांवों से वापस लाने के लिए, कोई विशेष व्यवस्था की जाए तो भारी तादाद में उनकी वापसी शुरू हो जाएगी.
(इनपुट-आईएएनएस)