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बिहार: इंसेफलाइटिस से बच्चों की मौत पर मंत्री के बिगड़े बोल- 'किसको पता कितना दिन जीना है'

अब तक इससे 37 बच्चों की मौत हो चुकी है. कई बच्चे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं लेकिन बिहार सरकार के मंत्री गलत बयानों से बाज नहीं आ रहे हैं. 

बिहार: इंसेफलाइटिस से बच्चों की मौत पर मंत्री के बिगड़े बोल- 'किसको पता कितना दिन जीना है'
अब तक इससे 37 बच्चों की मौत हो चुकी है.

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर में इंसेफलाइटिस की वजह से मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. अब तक इससे 37 बच्चों की मौत हो चुकी है. कई बच्चे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं लेकिन बिहार सरकार के मंत्री गलत बयानों से बाज नहीं आ रहे हैं. 

बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार का कहना है किसको क्या पता है कि कौन कितना दिन जिएगा. इसके बाद उन्होंने कहा कि सरकार कोशिश कर रही है कि बच्चों को बचाया जा सके. प्रमोद कुमार के इस संवेदनहीन बयान की जितनी भर्त्सना की जाए कम ही होगी. 

 

सबसे अहम बात है कि प्रमोद कुमार पहले शख्स नहीं है जिन्होंने बेतुका बयान दिया है. नवल किशोर यादव ने भी कहा था कि बच्चे कोई पहली बार नहीं मर रहे हैं. पिछले 10 दिनों में इंसेफलाइटिस बुखार की वजह से मुजफ्फरपुर में 37 बच्चों की मौत हो चुकी है. मुजफ्फरपुर में 36 बच्चे 4 पीआईसीयू में चमकी बुखार से पीड़ित भर्ती हुए थे. वहीं, सोमवार की रात में मौसम में बदलाव के कारण मंगलवार की सुबह तक कोई बीमार बच्चा नहीं पहुंचा है.

सिर्फ एसकेएससीएच में इस गर्मी के मौसम में 15 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.भारतीय राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और सीडीसी ने 2013 और 2014 में इस पर शोध किया. रिपोर्ट के अनुसार, "2013 के परीक्षणों में एक विशेष लक्षण पाया गया जो किसी टॉक्सिन की वजह से हो सकता है."

 2014 के परीक्षण के दौरान भी बुखार के पीछे किसी संक्रमण का प्रमाण नहीं मिला. इससे भी किसी टॉक्सिन के संपर्क में आने की संभावना को बल मिला. यही नहीं, बुखार फैलने का दौर प्रायः मुजफ्फरपुर में लीची के उत्पादन के मौसम में आता है.